विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय महामंत्री और वर्तमान संरक्षक बड़े दिनेश जी ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट के लोगों ने बहुत ही चुनौती पूर्ण कार्य अपने हाथों में लिया है। यह कार्य सभी के सहयोग से पूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि यहां पर तीन मंदिर प्राचीन काल में स्थापित किए गए थे। जिनके जीर्णोद्धार की आवश्यकता है। आज श्री कुमारेश्वर मंदिर की जीर्णोद्धार का शिलान्यास इस दिशा में एक प्रभावी कदम है। उन्होंने ट्रस्ट को से जुड़े लोगों को सलाह दी की वे इसकी वास्तुकला पर गहन विचार करें और उसके बाद निर्माण कार्य प्रारंभ करवाएं।
ये संत रहे उपस्थित
- स्वामी विमर्शानंद गिरि जी मठाधीश श्रीलालेश्वर महादेव मंदिर, शिव मठ शिव बाड़ी, बीकानेर
- स्वामी अमृतानन्द जी महाराज जी श्री कृष्णायन् गौशाला भागीरथी धाम, हरिद्वार
- स्वामी श्री प्रकाशानन्द जी महाराज, बाजना, अलीगढ़
- महामण्डलेश्वर डाॅ. अन्नपूर्णाभारती पुरी जी, बगलामुखी मन्दिर, अलीगढ़
- अनंत श्री विभूषित स्वामी पूर्णानन्द पुरी जी, वैदिक ज्योति संस्थान, अलीगढ़
- परमपूज्य स्वामी मनोहर गिरि जी महाराज (हितैषी महाराज), आवाह्न अखाड़ा, अलीगढ़
- परमपूज्य स्वामी गोपेश्वर महाराज जी, दाऊजी, मथुरा
- महन्त विनोद नाथ जी, मानेसर मन्दिर, राजूदास जी महाराज अध्यक्ष संत सभा
पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ईश्वर को जन्म देने की शक्ति केवल सनातन में है, इसी के तहत राम और कृष्ण का जन्म हुआ। इसलिए इस सृष्टि में सभी के पूर्वज सनातनी थे। बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, वर्मा और नेपाल में जो हालात हो रहे हैं उन्हें लेकर सावधान होने की जरूरत है। ऐसी स्थिति भारत में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि असली शंकराचार्यों को परेशान किया जाता है और आतंकवादियों को नकली शंकराचार्य बनाकर देशभर में घुमाया जाता है। यह सनातनियों के लिए चिंता का विषय है। शंकराचार्य शुक्रवार को इगलास तहसील के गांव सहारा खुर्द-पाताल खेड़िया में प्राचीन शिव मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर आयोजित राष्ट्रधर्म सभा में शामिल होने आए थे।
शंकराचार्य ने हम हिंदू राष्ट्र बनाएंगे, भारत भव्य बनाएंगे के उद्घोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की। मातृशक्ति की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत भूमि को नमस्कार है कि यहां माताएं देवताओं को जन्म देती हैं, यह शक्ति सनातन में ही है। इसलिए जीवन जीविका के लिए न हो बल्कि देश के लिए हो। उन्होंने भगवान शिव के स्वरूपों की व्याख्या करते हुए कहा कि शिव, शंकर और प्रलयंकर यानी जैसा स्वरूप-वैसा प्रभाव। जहां तक संभव हो शिव-शिव ही जपना चाहिए। शिव का नाम लेकर शयन और जागरण होगा तो स्वप्न भी साकार होंगे। सनातन सिद्धांत के प्रति आस्थावान होने की आवश्यकता है। हमें इस सत्य को स्वीकार करना होगा कि सबके पूर्वज सनातनी थे, चाहे ईसा मसीह हों या मोहम्मद साहब।
उन्होेंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत में शिक्षा पद्धति विकृत हो गई, जबकि एक समय था जब अमेरिका के चर्चित वैज्ञानिकों ने भी वेदांत के सिद्धांतों पर बल दिया था। भारत भूमि की ही शक्ति है कि यहां जगत बन सकता है और जगत बना सकता है। इसी के तहत यहां अवतार हुए। यहां की मातृशक्ति ने जगदीश और जगदीश्वरी को जन्म दिया। अब कलियुग में कल्कि अवतार होगा।