डीएस डिग्री कॉलेज में बंदरों के खाैफ से निजात देने के लिए काम पर रखे गए गोलू लंगूर की सेवा शुक्रवार को समाप्त कर दी गई। शनिवार को वह दोबारा कॉलेज पहुंचा और पूरे दिन वहीं रहा। वन विभाग ने उसे वहां से हटाने के लिए दूसरे लंगूर को बुलाया, लेकिन बात नहीं बनी। दूसरे लंगूर को वापस जाना पड़ा। गोलू को प्रतिमाह 12 हजार रुपये दिए जा रहे थे।
शनिवार सुबह गोलू दोबारा उसी पेड़ पर पहुंचा, जहां वह बैठता था। जैसे ही वन विभाग के अधिकारियों को इसकी भनक लगी तो वह उसे पकड़ने आ गए। उसे पेड़ से नीचे उतारने का काफी प्रयास किया, लेकिन वह नहीं उतरा। तीन से चार घंटे के बाद गोलू लंगूर के दोस्त भोलू लंगूर को लाया गया।
वन विभाग के पुत्तूलाल उसे स्कूटी पर बैठा कर लेकर आए। भोलू स्कूटी से उतरते ही पहले मंदिर पहुंचा, फिर अपने दोस्त गोलू की तरफ देखने लगा। भोलू ने गोलू को घुड़की देकर बुलाया, मगर वह नीचे नहीं आया। बहुत प्रयास करने के बाद भी गोलू नीचे उतरकर नहीं आया। जिसके बाद वन विभाग की टीम भोलू को साथ लेकर वापस चली गई। कॉलेज में गोलू की चर्चा है। लोग उसे देखने के लिए उत्साहित हैं।
पेड़ पर बैठा लंगूर। संवाद