भाई दूज पर 1129 बहनों और 368 बच्चों ने भाइयों से मुलाकात की, जबकि 10 पुरुषों ने भी जेल में निरुद्ध बहनों से आकर मुलाकात की। वहीं अपराध निरोधक समिति की ओर से कारागार के बाहर बहनों के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई थी।
भाई दूज पर जब जेल की चहारदीवारी मेंं कैद भाइयों के तिलक करने बहनें पहुंचीं तो भाइयों को देख उनकी आंखें छलक उठीं। 23 अक्तूबर को यह नजारा देख कारागार स्टाफ भी भावुक होता रहा। सुबह से ही बहनों की कारागार के बाहर लाइन लगने लगी थी।
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वरिष्ठ जेल अधीक्षक बृजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि बहनों के लिए विशेष रूप से भाइयों से मिलने की छूट दी गई थी। भाई दूज का टीका करते समय बहनें खुश होने के साथ ही भावुक भी हो गईं। बहनों ने सुबह से ही व्रत रखकर अपने भाई की लंबी उम्र की कामना की। भाई को टीका करने के बाद ही बहनों ने अपना व्रत खोला। जब तक बहन ने टीका नहीं किया तब तक भाइयों ने भी व्रत रखा। बंदियों के परिजनों की भीड़ को देखते हुए जेल प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। लंबी लाइन लगी होने से बहनों ने काफी देर तक इंतजार किया। जब भाइयों से मुलाकात हुई तो वह तमाम परेशानियों को भूल गईं और उनके चेहरे पर मुस्कान छा गई। हालांकि वापसी में उनकी आंखें छलक उठीं।
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भाई दूज पर 1129 बहनों और 368 बच्चों ने भाइयों से मुलाकात की, जबकि 10 पुरुषों ने भी जेल में निरुद्ध बहनों से आकर मुलाकात की। वहीं अपराध निरोधक समिति की ओर से कारागार के बाहर बहनों के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई थी।
डेढ़ दर्जन पुराने बंदियों से मिलने आईं बहनें
जेल मुलाकात में 23 अक्तूबर को डेढ़ दर्जन करीब ऐसे पुराने भी बंदी रहे, जिनकी बहनें मुलाकात के लिए आईं। ये लंबे समय से कारागार में हैं। प्रतिवर्ष इनकी बहनें जेल में तिलक करने आती हैं। इनमें 10 वर्ष से निरुद्ध कर्मवीर, अरुण, पंकज, जितेंद्र व 8 वर्ष से निरुद्ध बंटी आदि शामिल हैं।