बड़ी संख्या में भाई और बहनों ने मथुरा पहुंचकर यमुना में स्नान कर पूजा-अर्चना की। ऐसी मान्यता है कि यम द्वितीया पर स्नान करने से उन्हें अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।
भाई दूज 23 अक्तूबर को पूरे उल्लास व पारंपरिक तरीके से मनाई गई। बहनों ने शुभ मुहूर्त में भाइयों के माथे पर मंगल तिलक कर मिठाई और मिश्री खिलाकर आरती उतारी और उनकी दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को आकर्षक उपहार भेंटकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया।
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बड़ी संख्या में भाई और बहनें एक-दूसरे के घरों पर 22 अक्टूबर को ही पहुंच गए। जो नहीं पहुंच सके वे 23 अक्तूबर की सुबह ही गंतव्य को निकल पड़े। महिलाओं ने घरों में चौक सजाकर यम द्वितीया की कहानी सुनाते हुए भाइयों का तिलक किया। गोला और मिठाई देकर भाइयों की सुख-समृद्धि एवं दीर्घायु की कामना की।
बहनों ने भाई दूज पर गोले (नारियल) देने के महत्व व परंपरा को निभाते हुए गोला भेंट किया। इसके चलते बाजार में गोले की काफी मांग रही। उधर, दुकानों पर भी मिठाई की काफी मांग रही। दुकानों पर स्टॉक में रखी हुई मिठाइयां भी बिक गईं। फलों के अलावा सूखे मेवों की भी काफी मांग रही। शहर से बड़ी संख्या में भाई और बहनों ने मथुरा पहुंचकर यमुना में स्नान कर पूजा-अर्चना की। ऐसी मान्यता है कि यम द्वितीया पर स्नान करने से उन्हें अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।