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भगत सिंह ने अलीगढ़ के क्रांतिकारियों को सिखाया था पेट्रोल बम बनाना

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स्वर्गीय हरिशंकर आजाद, स्वतंत्रता सेनानी। - फोटो : CITY OFFICE
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इकराम वारिस
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देश को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराने वाले क्रांतिकारियों के जज्बे से अंग्रेजी हुकूमत बेदम होने लगी थी। उनके मंसूबे क्रांतिकारियों की एकजुटता से फेल होने लगे थे। उधर, अलीगढ़ के शादीपुर गांव में प्रवास के दौरान शहीद-ए-आजम भगत सिंह क्रांतिकारियों को पेट्रोल बम बनाना सिखा रहे थे। सबके प्रयास से देश को आजादी मिली, लेकिन आज भी सरकारी सुविधाओं और मान-सम्मान के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के उत्तराधिकारी तरस रहे हैं। उन्हें यह भी मलाल है कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर उनके कार्यालय पर उनकी खुशियों में शामिल होने के लिए अधिकारी आते तक नहीं।
भगत सिंह ने हरीशंकर को बनाया था नौजवान सभा का सदस्य
खैर के मोहल्ला उपाध्याय में 3 सितंबर 1916 को पंडित जोधराज शर्मा व नारायणी शर्मा के घर जन्मे हरीशंकर आजाद कम उम्र में ही बाल स्वराज आश्रम खैर के संपर्क में आ गए। हर रविवार को वह कार्यकर्ता बैठक और स्वतंत्रता के लिए जनसंपर्क करने लगे। 1929 को शादीपुर में ठा. टोडर सिंह के यहां सरदार भगत सिंह से हरीशंकर की मुलाकात हुई। भगत सिंह ने उन्हें नौजवान सभा का सदस्य बना दिया। उन्होंने भगत सिंह से बम बनाने का प्रशिक्षण लिया और गांव बामौती के जंगलों में उसका सफल प्रशिक्षण भी किया। 1930 को ब्रिटिश फौज को उन्होंने काला झंडा दिखाया, जिस पर फौजियों ने उनकी पिटाई की। 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान पकड़े गए। उन्हें 16 महीने के सजा हुई। उनके बेटे दीपक शर्मा ‘अन्नू आजाद’ ने बताया कि उनके पिताजी का खैर के ब्रह्मचारी मंदिर में नेताजी सुभाषचंद्र बोस से संपर्क हुआ। खैर में चौराहे पर उनके पिताजी की गजक की दुकान थी, जहां बोर्ड पर वह खड़िया से देश की घटनाओं को लिखते थे। लोगों को पढ़कर जानकारी होती थी।
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उत्तराधिकारियों को मिले सम्मान कार्ड
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं उत्तराधिकारी संगठन के जिलाध्यक्ष दीपक शर्मा ‘अन्नू आजाद’ ने कहा कि सेनानियों के उत्तराधिकारियों को जो सम्मान मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पाया। 15 अगस्त व 26 जनवरी को मलखान सिंह जिला अस्पताल में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं उत्तराधिकारी संगठन के कार्यालय पर कार्यक्रम होता है, लेकिन उसमें भी अधिकारी नहीं आते। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की वयोवृद्ध पत्नियां खैर, टप्पल, सांकरा, इगलास सहित अन्य इलाकों में रह रहीं हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। उत्तराखंड में सरकार की तरफ से उत्तराधिकारियों को सुविधाएं मिल रही हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश में भी मिलनी चाहिए। उत्तराधिकारी का एक ऐसा कार्ड मिलना चाहिए, जिसेे दिखाने पर उन्हें सम्मान मिले।
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स्वतंत्रता संग्राम में कूदे छात्र ठा. नवाब सिंह चौहान
सितंबर 1930 में स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरित होकर ठा. नवाब सिंह चौहान, त्रिलोकीनाथ, रामगोपाल आजाद, रामलाल सहित अन्य छात्रों ने धर्म समाज इंटर कॉलेज से विद्यार्थी जीवन को तिलांजलि दे दी। 32 छात्रों को नोटिस दिया गया। इनमें अधिकांश छात्र वापस आ गए थे। ठा. नवाब सिंह के बेटे योगेंद्र चौहान ने बताया कि उनके पिता ने 1940 में जेल यात्रा की। 1942 की क्रांति में भी वह नजरबंद रहे। बाद में सांसद भी बने।
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