प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि उनका पहला लक्ष्य विवि के लिये नेशनल असेसमेंट एंड एक्त्रिस्डिशन काउंसिल से ए ग्रेड की मान्यता हासिल करना है। इसके अलावा वे चाहते हैं कि प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण, अत्याधुनिक प्रयोगशालायें छात्रों के लिये बेहतर सुविधायें रोजगार और समग्र व्यक्तित्व विकास के कार्यों को वरीयता प्राप्त हो। छात्रों को रोजगार दिलाने के लिये अनुस्थापन पाठ्यक्त्रस्म, ओरियेन्टेशन कोर्स पर जोर देते हुए इसके लिये विस्तृत योजनायें तैयार करने का निर्देश दिया।
विदित रहे कि मंगलायतन विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में प्रो. जैन का यह दूसरा कार्यकाल है। सन् 1948 में अलीगढ़ में जन्मे प्रो. जैन ने एएमयू से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक उपाधि प्राप्त की। आईआईटी रुड़की से 1971 में एमटेक और 1983 में हाइड्रोडायनेमिक बीयरिंग पर शोध कार्य के लिये उन्हें पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
अपने शिक्षण के चार दशक लंबे कार्यकाल के दौरान आईआईटी रुड़की और मंडी में कई प्रतिष्ठित शैक्षिक और प्रशासनिक पदों पर कार्य किया। मंगलायतन विश्वविद्यालय में दिसंबर 2009 से जनवरी 2014 के अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अनेक पग उठाये जिनसे विश्वविद्यालय के शैक्षिक वातावरण में गुणात्मक सुधार हुआ।