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Strike: अलीगढ़ में बैंकों की हड़ताल से 1000 करोड़ का कारोबार प्रभावित, तालाबंदी कर कर्मचारियों ने जताया विरोध

Thu, 10 Jul 2025 11:15 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

बैंक कर्मियों की एक दिवसीय हड़ताल से व्यापारी, उद्यमियों व आम उपभोक्ताओं को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लेन-देन के अलावा नकदी के संकट के साथ विभिन्न योजनाओं के लोन, डीडी, एनईएफटी, नेफ्ट चेक क्लीयरेंस आदि सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं।
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अपनी मांगो को लेकर प्रदर्शन करते यूपी बैंक एम्पलाइज यूनियन, संयुक्त किसान मोर्चा पदाधिकारी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के बैनर तले 9 जुलाई को केंद्रीय श्रम संगठनों द्वारा विभिन्न मांगों के समर्थन में देशव्यापी हड़ताल का अलीगढ़ में खासा असर देखने को मिला। जिले की 250 बैंक शाखाओं में कर्मचारियों ने तालाबंदी की और हड़ताल कर प्रदर्शन किया। हड़ताल से जिले भर में 1000 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ है। शहर में कई स्थानों पर लगे एटीएम खाली होने से नकदी संकट भी गहरा गया। 

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जिले में 25 राष्ट्रीयकृत बैंकों की 250 से अधिक शाखाएं हैं। बैंक कर्मियों की एक दिवसीय हड़ताल से व्यापारी, उद्यमियों व आम उपभोक्ताओं को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लेन-देन के अलावा नकदी के संकट के साथ विभिन्न योजनाओं के लोन, डीडी, एनईएफटी, नेफ्ट चेक क्लीयरेंस आदि सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं।

हालांकि, बैंक अधिकारी इस हड़ताल में शामिल नहीं हुए, जिससे सुबह बैंक शाखाओं में तालाबंदी करने के दाैरान बैंक कर्मचारियों से उनकी नोकझोंक भी हुई। इसके बाद सभी बैंक कर्मियों ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह पार्क, तस्वीर महल पर हुए विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। सभी संगठनों के नेता एवं कार्यकर्ता झंडे-बैनरों के साथ नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां एसीएम प्रथम विनीत मिश्रा को राष्ट्रपति के नाम संबोधित 11 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा।

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बैंक शाखाओं में कर्मचारियों पर बढ़ गया है काम का बोझ

धरने में वक्ताओं ने पर्याप्त भर्तियों की मांग और नियमित नौकरियां में आउटसोर्सिंग का कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि बैंकिंग एक बहुत ही महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपयोगिता सेवा है, जो बड़ी संख्या में ग्राहकों, खाताधारकों और आम बैंकिंग जनता को सेवा प्रदान करती है। हाल के वर्षों में बैंकों के ग्राहकों की संख्या कई गुना बढ़ गई है, जबकि कारोबार की कुल मात्रा में भारी वृद्धि हुई है। इसके परिणाम स्वरूप कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ गया है। बैंकों में पर्याप्त भर्ती नहीं हुई है। सेवानिवृत्ति, पदोन्नति, मृत्यु आदि से उत्पन्न रिक्तियों को नहीं भरा जा रहा है।

इन मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया
केंद्रीय ट्रेड यूनियन के संयुक्त बैनर तले हुई सभा में वक्ताओं ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों को सुदृढ़ बनाने, बैंकों और एलआईसी में निजीकरण एवं विनिवेश को रोकने, बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई वृद्धि पर रोक लगाने, पर्याप्त भर्तियां सुनिश्चित करने, आउटसोर्सिंग व अनुबंध पर नौकरियों पर रोक लगाने, श्रमिक विरोधी चारों श्रम कोड रद्द करने, बिजली के निजीकरण का फैसला वापस करने, एनपीएस (नई पेंशन स्कीम) खत्म कर ओपीएस (पुरानी पेंशन स्कीम) बहाल करने, सभी को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने, यूपी में मर्ज के नाम पर सरकारी स्कूलों को बंद करने का फैसला वापस लेने, आशा, रसोइया, आंगनबाड़ी, सहायिका समेत तमाम सरकारी योजनाओं में लगे संविदा कर्मियों को स्थायी करने की मांगें शामिल थीं।
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प्रदर्शन में यह हुए शामिल

इस हड़ताल में विभिन्न बैंक संगठन, फेडरेशन, एलआईसी, संयुक्त किसान मोर्चा, विद्युत संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति, बिजली संविदा कर्मचारी संघ, ऑल इंडिया बीमा कर्मचारी संघ, यूपी बैंक कर्मचारी यूनियन, उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मेडिकल एवं सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन, निर्माण श्रमिक संगठन, अटेवा, ऑल इंडिया लायर्स यूनियन, पीयूसीएल, उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ, रिक्शा चालक यूनियन, क्रांतिकारी किसान यूनियन, अखिल भारतीय किसान सभा आदि शामिल हुए।

धरने को यूपी बैंक कर्मचारी यूनियन के जिला संयोजक व जिलाध्यक्ष प्रदीप चौहान, ट्रेड यूनियन नेता ललित शर्मा, क्रांतिकारी किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव शशिकांत, संयुक्त बिजली कर्मचारी मोर्चा के संयोजक राहुल बाबू कटियार, इकाई सचिव बीरेंद्र धूसिया, विनोद कुमार गौतम, सूरजपाल उपाध्याय, पूनम, अल्पना, निकिता स्वाति, मोनिका, गौरव तिवारी आदि ने संबोधित किया।
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