कल्याण सिंह की सिफारिश पर फैसला नहीं होने के बाद उनके समर्थकों की नाराजगी कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी वह कई बार इस तरह से नाराज हो चुके हैं। वर्ष 1994 में कल्याण सिंह मुनीष गौड़ को लोकसभा का टिकट दिलाना चाहते थे, लेकिन शीला गौतम मजबूती से दावेदारी कर रही थीं। भाजपा ने कल्याण के पुरजोर विरोध के बावजूद शीला को टिकट दिया और वह जीत गईं।
उस वक्त अलीगढ़ से ‘अटल जीतेंगे या कल्याण...’ के नारे बुलंद हुए थे, जो अखबारों की सुर्खियां भी बने। नाराजगी इस कदर थी कि कल्याण सिंह खुद अटल जी की अलीगढ़ में हुई चुनावी रैली में शामिल नहीं हुए, जो शीला गौतम के समर्थन में थी। वह पूरे प्रदेश में एक सिर्फ एक लोस प्रत्याशी के प्रचार में गए।
इसके बाद वर्ष 1999 के चुनाव में अशोक प्रधान की बुलंदशहर लोक सभा सीट से टिकट होने पर कल्याण खेमा नाराज हुआ। उनका बुलंदशहर में विरोध किया गया। विरोध भी इतना कि अशोक प्रधान को डिबाई में नहीं घुसने देने का एलान तक हुआ था।
दोनों पक्ष आमने सामने आ गए तो पुलिस प्रशासन ने उनको अलग अलग जगहों पर रोका। अब एक बार फिर से कल्याण समर्थक सतीश गौतम की टिकट पर नाराज हुए और राज पैलेस के बाहर जमकर नारेबाजी हुई। अब सभी को कल्याण के अगले कदम का इंतजार है।
1-वर्ष 1999 में भाजपा से निकाले जाने पर राष्ट्रीय क्रांति पार्टी का गठन किया।
2-वर्ष 2004 में वापस आ गए थे। 2004 में ही बुलंदशहर से भाजपा सांसद बने।
2-वर्ष 2009 में भाजपा से फिर अलग हुए, एटा से निर्दलीय लड़े और सांसद बने।
3-वर्ष 2009 जनवरी में राजवीर सिंह राजू सपा में शामिल हुए और स्वास्थ्य मंत्री बने।
4-वर्ष 2010 में पांच जनवरी को अपने जन्मदिन पर जन क्रांति पार्टी बनाने की घोषणा।
5-वर्ष 2014 में भाजपा में वापसी हो गई, तब यूपी के प्रभारी अमित शाह मनाने आए थे।