चाय की पत्ती पैकिंग करतीं रीनेश देवी।
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टप्पल ब्लॉक के गांव जहानगढ़ की रीनेश देवी ने आत्मनिर्भर बनने के लिए चाय की पत्ती को ही रोजगार का जरिया बना लिया। असम की चाय में वह अपने मसालों का स्वाद घोल रही हैं।
स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने करीब डेढ़ माह पहले जीवन ज्योति चांद सूरज स्वयं सहायता समूह के नाम से चाय पत्ती तैयार करने का काम शुरू किया। असम से मंगाई गई चाय की पत्ती में अपने स्तर पर तैयार मसालों का मिश्रण कर वह अलग स्वाद वाली चाय बाजार में उतार रही हैं।
खास बात यह है कि उनके इस छोटे से कारोबार से गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिला है। रीनेश देवी असम से चाय की पत्ती मंगाती हैं। इसके बाद उसमें इलायची, अदरक और तुलसी के पत्तों का मिश्रण किया जाता है।
मसालों की मात्रा और स्वाद का संतुलन तैयार करने के बाद चाय पत्ती की पैकिंग की जाती है। तैयार उत्पाद को स्थानीय स्तर पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।