वाणिज्य कर विभाग की आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ने कर चोरी पर नकेल कसना शुरू कर दिया है, जिससे लगभग 1816 करोड़ रुपये का कर अपवंचन (कर चोरी) पकड़ा जा चुका है। ये कर चोरी केवल अलीगढ़, कासगंज और एटा जिले में पकड़ी गई है, जिस पर अलीगढ़ से विभागीय कार्रवाई हो रही है। इतनी बड़ी कर चोरी को पकड़ना जीएसटी पोर्टल की वजह से संभव हुआ है, जिस पर आने वाली हर छोटी बड़ी जानकारी से मजबूत डेटा बेस तैयार हुआ है, जो अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को हर जानकारी दे रहा है।
पहली जुलाई 2017 से जीएसटी लागू होने के बाद जीएसटीएन पोर्टल पर अपलोड होने वाली सूचनाएं अब बड़ा डेटाबेस बन चुकी हैं। इसी डाटाबेस की मदद से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस संभव हुआ है। इसमें फर्मों के व्यापारिक ट्रेंड, उनकी कार्यप्रणाली, खरीद-बिक्री के चलन डेटा के रूप में मौजूद है। जब भी किसी फर्म का औसत कर कम या ज्यादा होता है, या रिफंड ज्यादा होने लगता है तो वह शक में दायरे में आता है। शक होने पर संबंधित फर्म का और डाटा एकत्र कर उसकी जांच होती है। जांच में कर चोरी का सटीक पता लगने पर एसआईबी की जांच शुरू हो जाती है। अब अधिकांश जांचें लखनऊ मुख्यालय के निर्देश पर होती हैं।
एसआईबी के ज्वाइंट कमिश्नर केके राय बताते हैं कि 31 मार्च 2020 तक डेटा की मदद से अलीगढ़, एटा और कासगंज में लगभग 307 छापे मारे गए, जिसमें 41.53 करोड़ रुपये का माल सीज किया गया। सीज हुए माल पर 6.36 करोड़ रुपये अर्थदंड और कर वसूला गया। इन सभी मामलों में लगभग 1816 करोड़ रुपये की अनुमानित कर चोरी मिली है, जिस पर सेक्टर स्तर से विभागीय अधिकारी कार्रवाई कर रहे हैं। मार्च 2020 में कोरोना के चलते लॉकडाउन होने के बाद कारोबार ठप हुआ तो जांच पड़ताल रोकी गई। अब फिर से जांच शुरू हो गई है। जनवरी और फरवरी 2021 में अब तक छह मामलों में कार्रवाई हुई है, जिसमें बड़ी मात्रा में कर चोरी सामने आई है। इन सभी पर कार्रवाई हो रही है।
एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन एके माहेश्वरी कहते हैं कि जीएसटीएन पोर्टल से तैयार डेटा बेस से देश की किसी फर्म के बारे में कुछ ही देर में पता चल जाता है, जिससे दूसरी फर्म से उसके कारोबार का हिसाब किताब आसानी से सामने आ जाता है। इससे कर चोरी पता करने में बड़ी मदद मिलती है। इसलिए अब कार्रवाई सटीक हो रही है और इसकी गुणवत्ता भी पहले से कहीं बेहतर हुई है।
- पहली जुलाई 2017 को लागू हुआ था जीएसटीएन पोर्टल
- वाणिज्य कर की एसआईबी टीम ने इस अवधि में 307 जांचें कीं
- इन सभी जांचों में 41.53 करोड़ रुपये का माल सीज किया गया
- सीज हुए माल पर 6.36 करोड़ रुपये अर्थदंड और कर वसूला गया