प्रशासनिक उदासीनता पर ग्रामीणों में गुस्सा
घटना के 24 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी घर या गांव में कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। इससे परिजनों और ग्रामीणों में रोष है। चचेरी बहन कुसुम शर्मा व चचेरे भाई पवन शर्मा का कहना है कि हमने स्वयं शासन-प्रशासन, एसडीएम, बीडीओ और यहां तक कि ग्राम प्रधान तक को सूचित किया, लेकिन वह घर नहीं पहुंचे।
ग्रामीणों ने खुद संभाली कमान
गांव निवासी पंकज शर्मा और राकेश ने बताया कि अधिकारियों को फोन करने पर अभी टाइम नहीं है या बाद में भेज देंगे जैसे जवाब मिले। यहां तक कि प्रशासन ने अंतिम संस्कार स्थल की सफाई के लिए सरकारी जेसीबी मशीन देने से भी मना कर दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने खुद जेसीबी और ट्रैक्टर की व्यवस्था की और खेत की जोताई व सफाई करवाकर अंतिम संस्कार स्थल तैयार किया। जितेंद्र अपने चार विवाहित बहनों (किरन, सुमन, समिता, अजनेश) और दो भाइयों (रमाकांत व भूपेंद्र) में सबसे छोटे थे। पिता करुआ शर्मा का करीब 12 वर्ष पूर्व ब्रेन हेमरेज से देहांत हो चुका है। ज्ञात रहे वायुसेना के मालवाहक विमान की असम के जोराहट एयरबेस पर हुए हादसे में जितेंद्र सहित पांच सैन्यकर्मी बलिदान हो गए थे।
राज्यमंंत्री दिलेर और कांग्रेस नेता विवेक बंसल पहुंचे घर
शाम को राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह दिलेर गांव में पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। इसके बाद कांग्रेस के पूर्व विधायक विवेक बंसल और आलोक गौड़ ने गांव पहुंचकर संवेदना व्यक्त की।