फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Aligarh News: गिरफ्तारी पक्की, कागज कच्चे..पुलिस को लेनी पड़ी क्लास

विज्ञापन
विज्ञापन
गिरफ्तारी के बाद भी केस अदालत में टिक नहीं पा रहे। इसकी वजह मीमो और कानूनी प्रक्रिया में पुलिस की चूक है। मीमो में समय और स्थान का साफ उल्लेख नहीं, गिरफ्तारी का आधार गायब, परिजनों को सूचना तक दर्ज नहीं जैसी कमियों के चलते कई मामलों में गिरफ्तारी ही कटघरे में आ गई और आरोपी को राहत मिल गई।
विज्ञापन




भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लागू होने के बाद ऐसी खामियां लगातार सामने आई हैं। हाईकोर्ट ने इस पर सख्त टिप्पणी भी की। इसके बाद डीजीपी ने विवेचकों को प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए। इसके तहत अब जिलेवार प्रशिक्षण कराया जा रहा है, ताकि गिरफ्तारी और तलाशी की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत हो सके।



इसी के चलते अलीगढ़ पुलिस अब प्रशिक्षण के जरिए सुधार में जुटी है। रविवार को पुलिस लाइन में शुरू हुई कानून की क्लास में अभियोजन अधिकारियों ने साफ कहा कि अगर मीमो में समय, स्थान, आधार या परिजनों को सूचना का उल्लेख नहीं है, तो अदालत रिमांड तक खारिज कर सकती है। आसान शब्दों में कहें तो इससे आरोपी को रिहाई मिल सकती है।
विज्ञापन




पूरी मेहनत कागजी चूक से बेकार

प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने बताया कि गिरफ्तारी मीमो में खामी का सीधा असर कोर्ट में दिखता है। रिमांड खारिज हो सकती है और गिरफ्तारी को अवैध माना जा सकता है। यानी पूरी मेहनत एक कागजी चूक से बेकार हो जाती है। गिरफ्तारी के समय 16 बिंदुओं का मीमो अनिवार्य है, जिसमें समय, स्थान, आधार के अलावा परिवार को सूचना, साक्ष्य और धाराएं, चोटों और तलाशी का विवरण भी शामिल है। इनमें से एक भी बिंदु छूटा तो केस कमजोर पड़ सकता है।




नजीर: जब चूक बनी राहत की वजह

1. सनी दयाल मामला: परिवार को सूचना और गिरफ्तारी स्थान में गड़बड़ी पर हाईकोर्ट से राहत मिली।

2. बन्नादेवी केस: मीमो अधूरा, मजिस्ट्रेट नाराज बाइक चोरी के मामले में मीमो अधूरा होने पर मजिस्ट्रेट नाराज हुए। बाद में दरोगा ने ट्रेन के आगे आत्महत्या का प्रयास किया।

3. अकराबाद वीडियो: तलाशी प्रक्रिया पर सवाल, पुलिसकर्मी निलंबित



तलाशी मीमो भी भरना जरूरी

प्रशिक्षण में स्पष्ट किया गया कि गिरफ्तारी के साथ-साथ तलाशी मीमो भरना भी अनिवार्य है। इसमें वीडियोग्राफी के साथ तलाशी, गवाह और बरामदगी का पूरा विवरण दर्ज करना जरूरी है। किसी भी स्तर पर चूक होने पर कार्रवाई प्रभावित हो सकती है।



सभी सीओ को सख्त पर्यवेक्षण के निर्देश जारी किए हैं। जिले में हर दिन 40 के करीब अपराध दर्ज होते हैं। उनमें गिरफ्तारी के समय सभी नियमों का पालन हो, इस पर पूरा फोकस है। साथ में प्रशिक्षण भी कराया जा रहा है।
विज्ञापन


-नीरज जादौन, एसएसपी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें