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Aligarh: 30 डॉक्टर समेत 118 संविदा कर्मियों की नियुक्तियों का रिकॉर्ड गायब, 13 साल बाद तलाशा जा रहा

Fri, 07 Nov 2025 10:40 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

स्वास्थ्य विभाग में 13 साल पहले हुईं डाक्टरों सहित अन्य पदों की संविदा नियुक्तियों की प्रक्रिया का मामला उस समय भी बहुत चर्चा में रहा था। करीब छह महीने चली इस नियुक्ति के दौरान उस समय नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों का दौर भी चला।
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रिकॉर्ड - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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अलीगढ़ के जिला स्वास्थ्य विभाग में सन 2012 में हुई 30 चिकित्सकों सहित 118 संविदा कर्मियों की नियुक्तियों का रिकॉर्ड गायब हो गया है। अब यह पता नहीं चल पा रहा है कि नियुक्तियों के लिए नियमों का पालन किया गया था या नहीं। इस बात की जानकारी तब हुई जब 13 साल पुराने रिकॉर्ड की वर्तमान में जरूरत पड़ी। जब पुराना रिकॉर्ड खंगाला गया तो विभाग में इसके कोई दस्तावेज ही नहीं मिले। पूरे घटनाक्रम की जानकारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज त्यागी ने शासन को भेज दी है।

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सन 2012 में मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कार्यालय मलखान सिंह जिला अस्पताल परिसर में ही संचालित होता था। जिस बिल्डिंग में वह कार्यालय संचालित था वह बहुत जर्जर स्थिति में था। इसी के चलते वर्ष 2015 में सीएमओ कार्यालय को लाल डिग्गी पर शिफ्ट कर दिया गया । वर्ष 2012 में स्वास्थ्य विभाग में 30 चिकित्सकों सहित अलग-अलग पदों के लिए संविदा पर नियुक्तियां निकाली गई थीं। इन चिकित्सकों व स्टाफ को जिले के सरकारी अस्पताल सहित सीएचसी और पीएचसी पर नियुक्ति किया गया था। नियुक्ति के बाद इनकी प्रक्रिया पर सवाल उठे। 

फरवरी 2025 में इस संबंध में शिकायतों के बाद विभाग से विवरण मांगा गया कि सन 2012 में हुई संविदा की नियुक्तियों के समय कौन सी चयन समिति थी। इनमें कौन- कौन अधिघकारी शामिल थे। इसके अलावा नियुक्तियों के संबंध में विज्ञापन कहां प्रदर्शित किया गया था। इन नियुक्तियों की साक्षात्कार कमेटी में कौन था। यह मामला शासन तक पहुंचा तो वहां से स्थानीय विभाग से जानकारी मांगी गई। इसके बाद विभाग में सन 2012 का रिकार्ड खंगालने का काम शुरू हुआ। कई महीने तक कवायद करने के बाद जब रिकॉर्ड नहीं मिला तो शासन को लिखित में अवगत कराया गया है कि इन नियुक्तियों के संबंध में विभाग में कोई रिकार्ड नहीं है।

उस समय सीएमओ कार्यालय मलखान सिंह जिला अस्पताल में संचालित होता था। वहां से सन 2015 में लाल डिग्गी पर कार्यालय हुआ तो बहुत सारा रिकार्ड संभवत: नष्ट हो गया। अब कार्यालय में यह रिकार्ड नहीं है। इस संबंध में शासन को भी अवगत करा दिया है। - डॉ. नीरज त्यागी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

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छह महीने तक चली थी प्रक्रिया, खूब चला था सिफारिशों का दौर

स्वास्थ्य विभाग में 13 साल पहले हुईं डाक्टरों सहित अन्य पदों की संविदा नियुक्तियों की प्रक्रिया का मामला उस समय भी बहुत चर्चा में रहा था। करीब छह महीने चली इस नियुक्ति के दौरान उस समय नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों का दौर भी चला। यही वजह रही कि विभाग के अधिकारियों को चयन के अंतिम नतीजे तक पहुंचने में छह महीने का समय लग गया। इस दौरान एक जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के बीच टकराव की घटना भी हुई जो चर्चा में रही।

विभाग से रिटायर हो चुके लोगों के मुताबिक अब उन स्वास्थ्य अधिकारी का स्वर्गवास हो चुका है। उस समय डॉक्टरों के अलावा टेक्नीशियन, फार्मेसिस्ट, स्टाफ नर्स, एएनएम (ऑक्सिलियरी नर्सिंग मिडवाइफरी) आदि पदों के लिए नियुक्तियां निकाली गई थीं। यह भी बताया गया है कि नियुक्ति के बाद जब एएनएम की तैनाती का क्रम आया तो कुछ एएनएम, जिनकी विभाग में अच्छी पैठ थी, उनको शहरी इलाकों में तैनाती दी गई। जबकि अन्य की ग्रामीण इलाकों में तैनाती हुई। ग्रामीण इलाकों में तैनात एएनएम ने उस समय विरोध प्रदर्शन भी किया था।
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