स्वास्थ्य विभाग में 13 साल पहले हुईं डाक्टरों सहित अन्य पदों की संविदा नियुक्तियों की प्रक्रिया का मामला उस समय भी बहुत चर्चा में रहा था। करीब छह महीने चली इस नियुक्ति के दौरान उस समय नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों का दौर भी चला। यही वजह रही कि विभाग के अधिकारियों को चयन के अंतिम नतीजे तक पहुंचने में छह महीने का समय लग गया। इस दौरान एक जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के बीच टकराव की घटना भी हुई जो चर्चा में रही।
विभाग से रिटायर हो चुके लोगों के मुताबिक अब उन स्वास्थ्य अधिकारी का स्वर्गवास हो चुका है। उस समय डॉक्टरों के अलावा टेक्नीशियन, फार्मेसिस्ट, स्टाफ नर्स, एएनएम (ऑक्सिलियरी नर्सिंग मिडवाइफरी) आदि पदों के लिए नियुक्तियां निकाली गई थीं। यह भी बताया गया है कि नियुक्ति के बाद जब एएनएम की तैनाती का क्रम आया तो कुछ एएनएम, जिनकी विभाग में अच्छी पैठ थी, उनको शहरी इलाकों में तैनाती दी गई। जबकि अन्य की ग्रामीण इलाकों में तैनाती हुई। ग्रामीण इलाकों में तैनात एएनएम ने उस समय विरोध प्रदर्शन भी किया था।