साजिद के साथ नईमुद्दीन ने भी यह काम शुरू किया। इसके बाद हमें उत्तराखंड व झारखंड राज्यों की आधार कार्ड बनाने वाली सरकारी साइटों का एक्सिस मिलने लगा। हम ग्राहकों का डेटा उसमें फीड करते थे। ऑनलाइन आकाश ही आधार कार्ड बनाकर हमें वापस भेजता था, जो हम ग्राहक को देते थे। इसके एवज में 200 रुपये प्रति आधार हम आकाश या उनके बंदों को ऑनलाइन भेजते थे, जबकि ग्राहक से 1000 रुपये प्रति आधार लेते थे। नए आधार कार्ड बनाने के साथ-साथ उन्हें अपडेट करने का भी काम करते थे। इस तरह इस मुकदमे में इन दोनों को पकड़ा गया है, जबकि आकाश, अमित व शरद फरार हैं, जिनके विषय में टीमें काम कर रही हैं।
आधार बनाने को बनाते फर्जी प्रमाण पत्र
सीओ के अनुसार दोनों ने स्वीकारा है कि आधार कार्ड बनाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र या मूल निवास प्रमाण पत्र की जरूरत होती है। ये प्रमाण पत्र वे साइटों से फर्जीवाड़ा कर बनाते थे। उसी की मदद से आधार कार्ड बनता था।
ये हुआ बरामद
दोनों जनसेवा केंद्रों से फर्जीवाड़ा कर बनाए गए 88 आधार कार्ड, 2 फिंगर प्रिंटर, 3 आई रीडर, 5 फर्जी मोहर, 4 कंप्यूटर सिस्टम, 1 डेस्कटॉप, 3 प्रिंटर, 3-3 माउस व कीबोर्ड, 2 मोबाइल व 2300 रुपये नकद।
एसटीएफ लखनऊ यूनिट ने क्वार्सी में कार्रवाई करने के लिए मदद मांगी थी। जिसके आधार पर यहां से दो लोगों को साइट हैककर आधार कार्ड बनाने के आरोप में पकड़ा गया। जिन्हें दिन में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया है। बाकी विवेचना में जो तथ्य सामने आएंगे। उसी अनुसार कार्रवाई की जाएगी।-मृगांक शेखर पाठक, एसपी सिटी