पंचायत चुनावों के चौथे चरण में वार्ड 10 से जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ने के लिये उसने अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाणपत्र लगा डाला, यहां तक कि पता भी गलत लिखाकर रिटर्निंग अफसर की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की। लेेकिन ग्रामीणों की शिकायत पर तहसील स्तरीय जांच में उसकी पोल खुल गई। इस पर कार्रवाई करते हुए उसका नामांकन निरस्त कर दिया गया। इस तरह चौथे चरण के पर्चो की जांच में निरस्त होने वाले पर्चो की संख्या तीन हो गई।
पंचायत चुनावों के चौथे चरण में अतरौली, बिजौली एवं जवां ब्लाक से जिला पंचायत सदस्य पद के लिये नामांकन भरने वाले 186 प्रत्याशियों के पर्चो की जांच बुधवार को पूर्ण हो गई। जांच के दूसरे दिन गत् दिवस शेष बचे ग्यारह से तेरह तक के तीन वार्डो के पर्चो की जांच के बाद आपत्तियों पर रोके गए वार्ड दस के प्रत्याशी रामकुमार एवं प्रताप सिंह के मामलों की भी सुनवाई हुई। इसमें रामकुमार के खिलाफ दर्ज कराई गई वोटर लिस्ट में दो जगह नाम होने की आपत्ति खारिज कर दी गई तो फर्जी जाति प्रमाणपत्र लगाने के आरोपी प्रताप सिंह मामले में तहसीलदार कोल से रिपोर्ट मांगी गई। तहसीलदार ने आरोप को सही ठहराते हुए ओबीसी वर्ग से ताल्लुक रखने वाले प्रताप सिंह द्वारा धनगर के रूप में लगाया गया अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र फर्जी बताया। इसे स्वीकार करते हुए रिटर्निंग अफसर ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया। बताते चलें कि गत् दिवस पहले दिन हुई जांच में दो प्रत्याशियों के पर्चे खारिज किये गए थे। इस तरह चौथे चरण में निरस्त होने वाले पर्चो की संख्या तीन हो गई। रिटर्निंग अफसर एवं एडीएम सिटी अवधेश तिवारी ने स्वीकार किया कि वार्ड दस के प्रत्याशी प्रताप सिंह का आवेदन फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर निरस्त कर दिया गया है।
शुक्रवार आज सुबह आठ बजे से दोपहर तीन बजे तक नाम वापसी होगी। इसके बाद प्रतीक चिन्ह आवंटित कर दिये जाएंगे। इधर क्षेत्र पंचायत सदस्यों के नामांकनों की जांच में अतरौली में पांच तो जवां में आठ पर्चे खारिज कर दिये गए।