अलीगढ़ में लोहे और पीतल के अच्छे गुणवत्ता वाले तालों का निर्माण तो होता ही था, साथ में उत्पादन भी बड़े पैमाने पर होता था। 1900 के आसपास अलीगढ़ में सालाना लगभग पांच लाख तालों का निर्माण होता था। इनकी तात्कालिक कीमत 276000 रुपये थी, अर्थात एक ताला लगभग पचास पैसे से कुछ ज्यादा की कीमत का था। इसके अलावा इगलास के 11 कारखानों में भी तालों का निर्माण होता था। इनकी कीमत 30000 रुपये थी।
हाथरस में फ्लोर मिल और चूना फैक्टरी भी स्थापित थी
सन 1900 के आसपास यूरोपीय मिलों की तर्ज पर हाथरस में फ्लोर मिल और चूना फैक्टरी लगाई गई। इसके अतिरिक्त सिकंदराराऊ में शीरा रिफाइनरी भी लगाई गई। सिकंदराराऊ में ही एक शीशा फैक्टरी लगाई गई, पर बहुत जल्द वह पूंजी और कुशल मजदूरों की कमी की वजह से ठप हो गई। लेकिन छोटी इकाइयों में कच्चे शीशे का उत्पादन होता रहा। पुरदिल नगर और कुछ अन्य स्थानों पर कांच की चूड़ियां बनाई जाती थीं।
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स्रोतः अलीगढ़ का गजेटियर 1909