प्रवीन बाजौता व जितेंद्र उर्फ कंजा की गिरफ्तारी सुनियोजित क्यों न मानी जाए, जिस तरह से पुलिस के सामने तथ्य उजागर हो रहे हैं, उन्हें लेकर बार-बार एक ही सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर इनकी गिरफ्तारी कराने में मददगार कौन है। जानकारी में आया है कि दोनों को भरतपुर के उद्योग नगर थाना पुलिस ने बीस-बीस मिनट के अंतराल के बाद गिरफ्तार किया। वह भी सड़क पर घूमते समय दो-दो सिपाहियों ने ही दोनों को दबोचा। थाने ले जाकर अवैध हथियार रखने के जुर्म में दाखिल कर दिया।
इस मामले में पुलिस लगातार बारीकी से जानकारी करने का प्रयास कर रही है कि आखिर इन दोनों की इस तरह गिरफ्तारी किसने कराई होगी और राजस्थान पुलिस में मददगार कौन है। हालांकि, अब तक की जांच में विनोद पथैना या उसके गैंग का ही नाम सामने आ रहा है, क्योंकि पथैना का वहां तगड़ा नेटवर्क है और वह वहीं जेल में भी है। पुलिस जानकारी में सामने आया है कि 10 फरवरी की रात में पुलिस सिपाहियों की टीम को बीस-बीस मिनट के अंतराल के बाद पहले प्रवीन बाजौता और फिर बाद में जितेंद्र कंजा के विषय में मुखबिरों के जरिए खबर मिली। दोनों को दो दो सिपाहियों ने गिरफ्तार कर थाने पहुंचाया और दाखिल कर दिया। ये बात सुनने में भी हजम नहीं हो रही कि एक जो कई माह से हाथरस जनपद से 25 हजार का इनामी है और दूसरा जिसे अलीगढ़ पुलिस सरगर्मी से तलाश रही है। इतनी आसानी से कैसे दबोच लिए गए।
किसको बचाने का प्रयास कर रहा बाजौता
पुलिस की टीम जब प्रवीन से भरतपुर पूछताछ करने गई और आज तक यहां दीवानी हवालात में कुछ देर पूछताछ की तो वह बेहद चालाकी से किसी को बचाने और पुलिस को चकमा देने की कोशिश करता दिखा। पुलिस को दोनों बार की बातचीत में उसने अपने तीसरे साथी के रूप में रोहिणी दिल्ली के अंगद का नाम बताया है। वह गोगी गैंग का सदस्य बताया है। मगर अलीगढ़ पुलिस ने दिल्ली से जानकारी की तो पता चला कि वहां अंगद नाम के किसी अपराधी का डोजियर ही दर्ज नहीं है। ऐसे में या तो पुलिस को वह सही नाम नहीं बता रहा या फिर अपने तीसरे साथी को बचाने का प्रयास कर रहा है। इस पहलू पर पुलिस काम कर रही है। हां, इतना जरूर पता चल रहा है कि वह जिस चालाकी से पुलिस को चकमा देने का प्रयास कर रहा है, किसी न किसी को तो बचाना चाह रहा है।