रेंज स्तरीय साइबर थाना पुलिस ने साइबर ठगी के एक और मुकदमे में बड़ी सफलता हासिल की है। इस बार मेरठ के एक कॉल सेंटर में बैठकर चलाए जा रहे साइबर ठगी गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया है। यह सरगना बिहार के एक युवक की मदद से पूरा नेटवर्क चला रहा था। लॉकडाउन काल में तो इसने ठगी के जरिए लाखों रुपये पार कर दिए। तीन माह में एक एकाउंट में ही 18 लाख रुपये का लेनदेन उजागर हुआ है। साइबर पुलिस ने इस ठग को बृहस्पतिवार को जेल भेज दिया। वहीं एक बैंक खाता भी फ्रीज करा दिया गया है।
साइबर थाने का पांचवां मुकदमा 6 नवंबर 2020 को वीना सागर पत्नी रामसागर निवासी र्साइं कृपा सुरेंद्र नगर क्वार्सी ने दर्ज कराया, जिसमें आरोप था कि उनसे क्रेडिट कार्ड के विषय में जानकारी कर उनके खाते से 1.10 लाख रुपये पार कर दिए गए। इसकी जांच के दौरान साइबर थाना पुलिस को आईसीआईसीआई का एक बैंक एकाउंट गाजियाबाद इंदिरा पुरम में संचालित प्रैसा फूड एंड कैटर्स फर्म के नाम से सामने आया। जब पुलिस उस फर्म तक पहुंची तो उसका मालिक 27 वर्षीय योगेश कुमार उर्फ विदित पुत्र कुशलपाल निवासी फेस-2 जानकी विहार लाला मोहम्मदपुर रोड थाना कंकरखेड़ा मेरठ का नाम सामने आया, जिसे बुधवार को मेरठ से गिरफ्तार कर लिया गया।
इंस्पेक्टर के अनुसार यहां लाकर हुई पूछताछ में उसने स्वीकारा कि वह अपने भाई व अन्य साथियों के साथ मिलकर साइबर ठगी का यह धंधा करता है। वह लोगों को फोन कर क्रेडिट कार्ड बंद करने या शुरू करने संबंधी प्रस्ताव रखते हैं। फिर ओटीपी जानकर मोबीक्यूक पेमेंट वॉयलेट में ट्रांसफर करते हैं। फिर उस वॉयलेट से रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कर एटीएम कार्ड की मदद से निकाल लेते हैं। उसके पास से एक मोबाइल, 1880 रुपये आदि बरामद हुए। इस गिरफ्तारी टीम में इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार के अलावा एसआई मनोज कुमार, महेश कुमार, अतुल कुमार गुप्ता, लक्ष्मी नारायण, विवेक कुमार, धीरज त्यागी, अजीत कुमार, अमर कुमार आदि शामिल रहे। इस गिरफ्तारी के बाद अभी इस मामले में तीन लोग फरार हैं, जिनकी तलाश कराई जा रही है और पांच बैंक खाते पुलिस रडार पर हैं। जिनकी जांच की जा रही है। वहीं आरोपी का रेस्टोरेंट का खाता फ्रीज करा दिया गया है।
ऐसे खड़ा किया पूरा नेटवर्क
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकारा कि वह पहले मुंबई में मॉडलिंग करता था। बाद में काम छूटने पर गाजियाबाद के इंदिरापुरम में आकर बतौर जिम ट्रेनर नौकरी कर ली। इसी बीच जिम में आने वाले सीवान बिहार के राहुल नाम के युवक से दोस्ती हुई। उसने 2019 में उसे ऑफर किया कि उसे कुछ बैंक खातों की जरूरत है, जिसमें काला धन सफेद करने के लिए मंगाना है। उसी में उसने अपना बैंक खाता दे दिया और धीरे-धीरे यह धंधा शुरू हो गया। बाद में उसने व छोटे भाई ने मिलकर इंदिरापुरम गाजियाबाद में एक रेस्टोरेंट खोला, जिसका संयुक्त बैंक खाता प्रैसा फूड एंड कैटर्स के नाम से है। लॉकडाउन में रेस्टोरेंट बंद होने पर खुद एक फूड सप्लीमेंट स्टोर में नौकरी करने लगा और छोटा भाई दिल्ली के क्लब में बतौर बाउंसर नौकरी करने लगा है। यह धंधा लगातार चल रहा है।
पांच खातों और कॉल सेंटर से धंधा
आरोपी ने स्वीकारा कि उसके खुद के एकाउंट के अलावा कुल पांच बैंक खातों में वे रुपये ट्रांसफर कराते थे। इनमें एक खाता उसके भाई का दो आगरा के लोगों के और दो अन्य हैं। यह लोग मेरठ के महेंद्र पार्क इलाके के एक कॉल सेंटर से धंधा चलाते थे। वहां से बैठकर लोगों को कॉल कराने के बाद रुपये वॉयलेट में मंगाते और वायॅलेट से अपने खातों में ट्रांसफर कराते थे। इन सभी बैंक खाता धारकों व रैकेट में शामिल लोगों को तलाशा जा रहा है।
इन युवकों के हैं महंगे शौक
खुद युवक बेशक एक नौकरी करता है। मगर गाड़ी, घर, खुद के खर्चे, गर्ल फ्रेंड पर खर्चे खूब होते हैं। वहीं बिहार का युवक पांच-पांच महंगी लग्जरी कार रखता है। 50 हजार रुपये प्रति रोज उसका खर्चा है।
पंजाब पुलिस ले गई कॉल सेंटर को
अलीगढ़ पुलिस ने जब इस मामले में जांच शुरू की तो मोबाइल नंबर चाहे किसी भी प्रांत का क्यों न हो, उसकी लोकेश महेंद्र पार्क मेरठ आ रही थी। जांच में आया कि अलग-अलग प्रांतों की आईडी से लिए गए नंबरों से मेरठ में बैठकर कॉल हो रही हैं। इस पर पुलिस जब वहां पहुंची तो पता चला कि दो-तीन दिन पहले पंजाब पुलिस यहां से पूरा कॉल सेंटर छापा मारकर उठा ले गई है।
-साइबर थाना पुलिस ने मेरठ से एक ऑनलाइन ठगी करने वाला गिरफ्तार किया है। उससे जुड़े अन्य लोगों की जांच कराई जा रही है। बाकी गिरफ्तारी भी जल्द कराई जाएंगी। साइबर टीम ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।
पीयूष मोर्डिया, आईजी रेंज