दिसंबर महीने की तनख्वाह अस्थायी कर्मचारियों की क्या रुक गई, मानो उनकी जिंदगी थम सी गई। राशन, दूध विक्रेता अब रुपये के लिए तकादा करने लगे हैं। घर में बीमार परिजनों के लिए रुपये के अभाव में दवा भी नहीं ला पा रहे हैं। बच्चों की फीस के लिए स्कूल वाले बार-बार रिमाइंडर भेज रहे हैं।
यह कर्मचारी खुद भी नहीं समझ पा रहे हैं कि उनके साथ क्या हो रहा है। एक तरफ तनख्वाह की चिंता तो दूसरी तरफ घर, परिवार की। कर्मचारियों ने बताया कि ईएमआई भी बाउंस हो रही है। बताते हैं कि करीब 80 फीसदी कर्मचारियों ने अलग-अलग तरीके से ब्याज और बैंक से ऋण ले रखे हैं।
अस्थायी कर्मचारियों के साथ मेरी और यूनिवर्सिटी इंतजामिया की पूरी हमदर्दी है। तनख्वाह के लिए कोशिश की जा रही है। कोई दो-चार लाख का मसला तो है नहीं, जो इंतजाम करके दे दिया जाए, बल्कि जब सरकार, यूजीसी और कोई फंडिंग एजेंसी धनराशि भेजेगी, तभी उन्हें तनख्वाह मिलेगी। बहरहाल, कुलपति भी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि जल्द ही कर्मचारियों के चेहरे पर मुस्कान लौट आए। -प्रो. मोहम्मद वसीम अली, प्रॉक्टर, एएमयू