एटा के सरकारी अस्पतालों में तैनात 18 डॉक्टर पिछले 13 साल से गायब हैं। यह कहां हैं कोई नहीं जानता। हैरानी इस बात की है कि इन चिकित्सकों को इस अवधि में कोई नोटिस तक जारी नहीं किया गया है, जबकि ये सभी बिना किसी सूचना के गैरहाजिर चल रहे हैं।
अब शासन ने एडी हेल्थ को इस संबंध में पत्र जारी कर जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही कहा है कि यह भी जानकारी की जाए कि स्थानीय अफसरों की तरफ से इन डॉक्टरों को नोटिस क्यों जारी नहीं किए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। एटा जिले के अस्पतालों से वर्ष 2012 में एक-एक कर 18 चिकित्सक बिना किसी सूचना के ड्यूटी से गायब होते चले गए। यह स्थिति तब है जब एटा के जिला अस्पताल और सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पहले ही डॉक्टरों की कमी चली आ रही है। नियमानुसार गैर हाजिर चिकित्सकों को नोटिस जारी होने चाहिए थे लेकिन स्थानीय स्तर से किसी को नोटिस नहीं भेजा गया, जबकि शासन स्तर से भी इन चिकित्सकों को आरोप पत्र जारी करने के निर्देश जारी होते रहे। इस बीच जो भी सीएमओ रहे उन्होंने भी इस पर ध्यान नहीं दिया।
अब जब शासन ने गायब चिकित्सकों की सूची तलब की तो विभाग में हल्ला मच गया। शासन ने भी सख्ती करते हुए एडी हेल्थ डॉ. राजेश कटियार को जांच के आदेश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि यह भी देखा जाए कि इन गायब चिकित्सकों को नोटिस क्यों नहीं दिया गया। शासन को भी जानकारी नहीं दी गई।
ये चिकित्सक हैं गायब
डॉ. रितु गौड़, डॉ. सौरभ, डॉ. राहुल चर्तुवेदी, डॉ. मो. अजमल, डॉ. मुब्बिसर अली, डॉ. मो कासिफ रजी, डॉ. अनुराग जैन, डॉ. विवेक कुमार जौहरी, डॉ. दिनेश कुमार जैन, डॉ. नीलेश कुमार शाक्य, डॉ. सौरभ सिंघल, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. धर्मेद्र कुमार राजपूत, डॉ. राकेश सिह, डॉ. रूबीना भाटी, डॉ. सुधांशु संत, डॉ. उपेंद्र भारद्वाज, डॉ. निती गुप्ता शामिल हैं।
- शासन ने आदेश दिया है कि सभी 18 चिकित्सकों को आरोप पत्र तामील कराया जाए और उनकी अनुपस्थिति के कारणों का पता लगाया जाए। तीन दिन के भीतर शासन ने जवाब मांगा है। - डॉ. राजेश कुमार कटियार, एडी हेल्थ