प्रत्येक दिन पांच लाख लीटर नाले के बदबूदार गंदे पानी की सफाई पौधे करेंगे। बाद में यह पानी सिंचाई एवं मत्स्य पालने में इस्तेमाल किया जाएगा। खास बात यह है कि इसके लिए इस्तेमाल नई तकनीक से गंदे पानी की सफाई के लिए बिजली का प्रयोग नहीं किया जाएगा। ऐसा अनोखा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट अगले एक महीने में अलीगढ़ में काम करने लगेगा। इस नई तकनीक को स्विंग्स के नाम से जाना जाता है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में यूरोपियन यूनियन एवं भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में स्विंग्स (सेफगार्डिंग वाटर रिसोर्सेज इन इंडिया विद ग्रीन एंड सस्टेनेबल टेक्नोलोजिज) शोध प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट जनवरी 2013 से लेकर जनवरी 2016 तक चलेगा। वैसे, प्रोजेक्ट फाइनल स्टेज में है। उम्मीद है कि अगले एक महीने में पौधे से नाले के गंदे पानी का ट्रीटमेंट कार्य शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट की सफलता देश की नदियों के भविष्य से भी जुड़ी है।