पद्मश्री डॉ. महमूद उर रहमान के इंतकाल की खबर आने के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एवं अलीगढ़ में शोक की लहर दौड़ गई है। एएमयू कुलपति (1995-2000) रहते हुए उन्होंने जो कार्य कराए, उसे लोग श्रद्धा से याद कर रहे हैं।
रविवार को उन्हें फतेहपुर स्थित उनके पैतृक गांव बिलंदा के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इसमें एएमयू विधि संकाय के पूर्व डीन प्रो. एम शब्बीर, ईसी सदस्य प्रो. इलियास खान, नसीम अहमद, प्रो. जेबा हसन, यूसुफ, आलम आदि शामिल हुए।
प्रो. शब्बीर बताते है कि महमूद उर रहमान एएमयू के ‘शाहजहां’ है। इस संस्थान को बुलंदी पर पहुंचाने में उनका अविस्मरणीय योगदान है। एएमयू उनके धड़कनों में बसता था।
पद्मश्री महमूद उर रहमान के भाजपा एवं आरएसएस नेताओं से भी मधुर संबंध थे। पिछले वर्ष आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार के रोजा इफ्तार पार्टी में शामिल हुए थे। संघ के अन्य कार्यक्रमों में भी वह अक्सर भाग लेते थे। जम्मू-कश्मीर के मामले में उनकी राय को अहमियत दी जाती थी। वह एएमयू चांसलर पद के लिए भी चुनाव लड़े थे।
एलएलएम का सपना नहीं हो सका साकार
पद्मश्री डॉ. महमूद उर रहमान के करीबी रहे प्रो. शब्बीर कहते है कि डॉ. महमूद उर रहमान ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और परशियन में टॉप किया। बाद में उन्होंने एलएलबी भी की। वह एलएलएम भी करना चाहते थे। राजस्थान की एक यूनिवर्सिटी में एडमिशन भी लिया था, लेकिन एलएलएम करने की उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। वह जम्मू कश्मीर कैडर के आईएएस थे। एडीएम, डीएम से लेकर चीफ सेक्रेटरी पद तक पर रहे।
प्रो. शब्बीर ने कहा कि महमूद उर रहमान के पैतृक गांव में उनके पूर्वजों की हवेली है। उन्होंने बताया कि एएमयू संस्थापक सर सैयद अहमद खान शुरूआती दिनों में बिलंदा में चंदा के लिए गए थे और महमूद उर रहमान के पूर्वजों से मिले थे। गांव वालों के साथ एक पेड़ के नीचे बैठक की थी।
महमूद उर रहमान बहुत उम्दा आदमी थे। कल्याण सिंह से उनके बेहद अच्छे संबंध थे। उनके सहयोग से एएमयू की करोड़ों रुपये की जमीन बचाई। भाजपा सांसद शीला गौतम के भाई यूजीसी के चेयरमैन थे। उनसे भी रहमान के बहुत अच्छे संबंध थे। उनके जमाने में एएमयू को सर्वाधिक ग्रांट मिली। उनके जमाने में एएमयू में बहुत काम हुए।
खुर्शीद अहमद खान, एएमयू कोर्ट सदस्य
एएमयू वीसी के रूप में डॉ. महमूद उर रहमान का कार्यकाल अविस्मरणीय है। वह कुशल प्रशासक एवं दूरदर्शी इंसान थे। भविष्य की जरूरतों को समझते थे और उसको ध्यान में रखकर एमबीबीएस के सीट बढ़वाईं। कई नए कोर्स शुरू किये। छात्राओं एवं रिसर्च स्कालर के लिए हॉल बनवाए। अंत समय तक उनका लगाव एएमयू में बना रहा।
मंसूर इलाही, एएमयू रिसर्च स्कालर
पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ. महमूद उर रहमान के निधन से एएमयू को गहरी क्षति पहुंची है। वे एएमयू के बहुत बड़े शुभचिंतक थे। अपने जमाने में उन्होंने बहुत से कार्य कराए। एएमयू बिरादरी उन्हें सदा याद रखेगी।
प्रो. शाफे किदवई, एमआईसी पीआरओ कार्यालय
वीसी के रूप में उपलब्धि
- बाब-ए-सैयद का निर्माण
- डेंटल कॉलेज भवन का निर्माण
- यूनिवर्सिटी के आसपास चाहरदीवारी का निर्माण
- गुलिस्तान-ए-सैयद
- बोर्डिंग हाउस, शिक्षक एवं कर्मियों के लिए गैस एजेंसी
- करीब 250 एकड़ एएमयू की जमीन को अवैध कब्जे से बचाया
- नर्सिंग हॉस्टल, वर्किंग वूमन्स हॉस्टल, लड़कियों के लिए आईजी हॉल, शेरवानी हॉल, एकेडमिक स्टॉफ कॉलेज, दो गेस्ट हाउस,
एकेडमिक डेवलपमेंट
- जेएन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट 100 से 150 तक बढ़वाना
- बीडीएस, बीई (पेट्रोलियम स्टडीज), एमएससी एग्रीकल्चर, बीई आर्किटेक्चर, पीजी इन लाइब्रेरी साइंस एवं इंफारमेशन टेक्नोलॉजी, मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मॉस कम्युनिकेशन, एमएससी इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री, लॉ फैक्टली बिल्डिंग का निर्माण, फाइव ईयर एलएलबी कोर्स की शुरूआत, छात्रों के लिए मौलाना आजाद लाइब्रेरी 24 घंटे खोलना।
महत्वपूर्ण पद
- अध्यक्ष, ऑल इंडिया मुस्लिम एजूकेशन कांफ्रेंस
- डायरेक्टर, सुतलेज ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज, मुंबई
- चेयरमैन, स्टडी ग्रुप, महाराष्ट्र सरकार
- सदस्य, हाई पॉवर कमेटी ऑफ गर्वमेंट ऑफ इंडिया ऑन हज
इन पदों पर भी रहे
- सेक्रेटरी टू गर्वमेंट ऑफ इंडिया, मिनिस्ट्री ऑफ पार्लियामेंटी अफेयर्स
- एड. चीफ सेक्रेटरी होम, जम्मू कश्मीर
- फार्मर सेक्रेटरी (रेवेन्यू), गर्वमेंट ऑफ जम्मू एंड कश्मीर
- वाइस चांसलर, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी
- चेयरमैन, जम्मू एंड कश्मीर स्टेट फाइनेंस कमीशन
- चेयरमैन एंड एड. मुंबई मर्केटाइल कोऑपरेटिव बैंक
- चेयरमैन एंड एड. वफ्फ बोर्ड पंजाब, हरियाणा एवं हिमाचल प्रदेश
- सदस्य, बोर्ड ऑफ गवनर्स, आईआईएम इंदौर
- सदस्य, पद्म अवार्ड कमेटी