एएमयू छात्रसंघ चुनाव में इस बार आधी आबादी ने अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज कराकर नया इतिहास रच दिया है। पहली बार छात्रसंघ की 10 सदस्यीय कैबिनेट में पांच छात्राओं ने जीत हासिल की है। यानी कैबिनेट में आधी सीटों पर छात्राओं का कब्जा रहा। इससे पहले छात्रसंघ कैबिनेट में एक या दो छात्राएं ही जगह बना पाती थीं।
सन् 1920 में यूनिवर्सिटी की स्थापना के बाद यह पहला मौका है, जब छात्रसंघ की कैबिनेट में छात्राओं की संख्या आधी पहुंची है। इस बार हानिया खान, अरीबा दिलशाद, शाजिया शमीम, अनिका रुम्मान राही और शाहीन परवीन ने चुनाव जीतकर कैबिनेट में जगह बनाई है।
चुनाव प्रचार में एक करोड़ रुपये फूंके
एएमयू और वीमेंस कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में जीत के लिए प्रत्याशियों ने प्रचार पर जमकर पैसा खर्च किया। दोनों चुनावों में प्रचार पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पोस्टर, बैनर, पंपलेट, प्रचार सामग्री से लेकर समर्थकों की आवाजाही और अन्य चुनावी गतिविधियों तक में जमकर धन खर्च किया गया। इसमें ईंधन का खर्च भी शामिल है।
एएमयू छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, कैबिनेट और एएमयू कोर्ट सदस्य पदों के लिए कुल 133 प्रत्याशी मैदान में थे। वीमेंस कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और कैबिनेट पदों के लिए 33 प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई थी। हर प्रत्याशी को 20 हजार रुपये प्रचार के नाम पर खर्च करने की अनुमति थी।
चुनावी शोर थमा तो यूनिवर्सिटी परिसर में पसरा सन्नाटा
25 अक्तूबर से नारों, जुलूसों, समर्थकों की भीड़ और प्रत्याशियों के प्रचार से गुलजार रहने वाला यूनिवर्सिटी परिसर शुक्रवार को शांत नजर आया। न कहीं चुनावी नारे सुनाई दिए और न ही प्रचार की भागदौड़ दिखाई दी। मतदान और मतगणना के बाद चुनावी गतिविधियां थमते ही कैंपस का माहौल पूरी तरह बदल गया। जिन रास्तों और स्थानों पर दिनभर प्रत्याशियों व समर्थकों की आवाजाही रहती थी, वहां खामोशी छाई रही।
प्रचार सामग्री हटाने में यूनिवर्सिटी को खर्च करने होंगे लाखों रुपये
प्रत्याशियों ने प्रचार के लिए यूनिवर्सिटी की दीवारों को पोस्टर, पेंटिंग और प्रचार सामग्री से पाट दिया। कहीं पोस्टर चिपकाए गए तो कहीं दीवारों पर लिखकर और रंगों से प्रचार किया गया। अब चुनाव संपन्न होने के बाद इन दीवारों को पुराने स्वरूप में लाने की चुनौती यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने है। प्रचार सामग्री हटाने और दीवारों की साफ-सफाई कराने में करीब पांच लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
चुनाव की थकान उतारी, दोपहर तक सोते रहे प्रत्याशी
कई दिनों की भागदौड़, दिन-रात का प्रचार, समर्थकों की भीड़ और चुनावी गहमागहमी के बाद आखिरकार प्रत्याशियों को सुकून से सोने का मौका मिला। एएमयू छात्रसंघ चुनाव का परिणाम आने के बाद जीत की खुशी और चुनावी थकान के बीच प्रत्याशियों ने भरपूर नींद ली। कई प्रत्याशी सुबह की बजाय दोपहर में उठे।
नींद खुलते ही सबसे पहले घरवालों को फोन कर चुनाव परिणाम की जानकारी दी। उधर, जीत की खबर फैलते ही रिश्तेदारों, दोस्तों और समर्थकों के फोन आने लगे। बधाइयों का सिलसिला देर तक चलता रहा। कई दिनों तक चुनावी माहौल में व्यस्त रहे प्रत्याशियों के लिए यह दिन राहत और खुशियों भरा रहा।
जीत की खुशी में डक पॉन्ड पर जश्न
विजयी प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने यूनियन हॉल के पास जमकर जश्न मनाया। शाम होते-होते डक पॉन्ड पर जश्न का माहौल बन गया। समर्थकों ने अपने चहेते प्रत्याशियों को फूल-मालाओं से लादकर जीत की बधाई दी। एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया गया। चुनाव प्रचार की गहमागहमी और नतीजों के इंतजार के बाद मिली जीत ने समर्थकों के उत्साह को दोगुना कर दिया।
दिव्यांग छात्र मोहम्मद अहमद खान ने रचा इतिहास
एएमयू छात्रसंघ चुनाव में इस बार एक ऐसी जीत दर्ज हुई, जिसने सबका ध्यान खींचा है। दिव्यांग छात्र मोहम्मद अहमद खान ने कैबिनेट सदस्य पद पर जीत हासिल कर यूनिवर्सिटी छात्रसंघ में जगह बनाई है। उन्होंने 10,794 मत प्राप्त किए, जो पिछले 20 वर्षों में कैबिनेट के किसी भी प्रत्याशी को मिले सर्वाधिक मत बताए जा रहे हैं।
चप्पे-चप्पे पर रहा सुरक्षा का पहरा, पीएसी-आरएएफ तैनात
चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। यूनिवर्सिटी के प्रमुख प्रवेश द्वार बाब-ए-सैयद, सर्किल, कलक्ट्रेट और वीमेंस कॉलेज के बाहर पीएसी व आरएएफ के जवानों को तैनात किया गया था। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल मुस्तैद रहा।
मतदान के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था या अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा का पहरा रहा और पूरे चुनाव पर पुलिस-प्रशासन की नजर बनी रही।