पैगंबर-ए-इस्लाम मोहम्मद मुस्तफा (सअ) को लेकर विवादित बयान देने वाले यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में छात्रों ने मार्च निकालकर प्रदर्शन किया। इस दौरान राष्ट्रपति को संबंधित ज्ञापन प्रॉक्टर को सौंपा।
रविवार शाम पांच बजे छात्रनेता फरहान जुबैरी की अगुआई में छात्रों ने मार्च निकाला, जो लाइब्रेरी कैंटीन से शुरू होकर डक प्वाइंट पर खत्म हुआ। इस मौके पर फरहान ने कहा कि हमारे नबी के बारे में विवादित बयान देने वाले नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे लोगों के खिलाफ जो किसी भी धर्म के लोगों की भावनाओं को आहत करते हैं, उनके लिए कानून बनाया जाए, ताकि इस तरह के बयान न दे सकें।
भड़काऊ बयान से हिंसा भड़क सकती है, क्योंकि जब कोई धर्म के खिलाफ बोलता है तो हो सकता है, वह अपने गुस्से पर काबू न रख सके। देश में धर्मनिरपेक्षता नहीं बची है, क्योंकि जब हमारे धर्म पर कोई बोलता है, तो उसके खिलाफ विरोध करते हैं, तो विरोध करने वाले को ही जेल भेज दिया जाता है।
प्रॉक्टर प्रो. वसीम अली ने बताया कि उन्हें छात्रों ने ज्ञापन सौंपा है, जो राष्ट्रपति को संबोधित है, जिसमें पैगंबर-ए-इस्लाम मोहम्मद मुस्तफा (सअ) को लेकर विवादित बयान देने वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
शताब्दी द्वार पर छात्रों का प्रदर्शन
यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर एएमयू छात्रों ने शताब्दी द्वार पर भी प्रदर्शन किया। छात्रों ने कहा कि यति नरसिंहानंद ने भड़काऊ बयान देकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की है। इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सौहार्द को कायम रखा जा सके। प्रदर्शन के बाद छात्रों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा।