नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में एएमयू मेें धरना-प्रदर्शन का सिलसिला बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। स्वराज्य इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव और गोरखपुर के सोशल एक्टिविस्ट व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील खान छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने बिल को रद करने के लिए बड़ा आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया।
योगेंद्र यादव ने कहा कि आजाद हिंदुस्तान में यह पहली बार हो रहा है कि सिटीजन को रिलीजन के साथ जोड़ा जा रहा है। नागरिकता संशोधन बिल जब तक पास नहीं हुआ था, तब तक आप एक धर्मनिरपेक्ष हिंदुस्तान में रह रहे थे लेकिन बिल पास होने के बाद अब ऐसा नहीं कहा जा सकता है। अब देश के लोकतंत्र पर गर्व नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस नागरिकता संशोधन बिल में हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई अगर नियम विरुद्ध भी आते हैं तो उन्हें देश की नागरिकता दे दी जाएगी। लेकिन अगर पाकिस्तान से कोई मुसलमान आए तो उसे नागरिकता नहीं दी जाएगी। अब कौन अपना है, कौन पराया है, कह नहीं सकते हैं। हिंदुस्तानी कानून कह रहा है कि अगर आप मुसलमान नहीं है तो यह देश आपका घर है और अगर आप मुसलमान हैं तो इस देश के दरवाजे आपके लिए बंद हैं।
गोरखपुर के सोशल एक्टिविस्ट डॉ. कफील खान ने कहा कि इस बिल से घबराने की जरूरत नहीं है। इस बिल को हमें डराने के लिए मोहरा बनाया जा रहा है। लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं। आप लोग अपने सभी दस्तावेज पूरे रखें। यह देश हमारा है और हमारा रहेगा। जो हम चाहेंगे वही होगा। अमित शाह जो बिल लाए हैं, वह असंवैधानिक हैं। इन्होंने बाबा साहेब के संविधान को माना ही नहीं। इनका देश को बांटने का इरादा है। आप छात्रों को ही इस जंग की मशाल उठानी होगी। डॉ. कफील ने कहा कि यह नागरिकता बिल इसलिए लाया गया है क्योंकि एनआरसी में 19 लाख लोग छूट गए। उनको अंदर करने के लिए यह लाया गया। उन्होंने कहा कि हमारा सारा विपक्ष साफ्ट हिंंदुज्म में छिप गया है हमें ही पहल करनी होगी। इस अवसर पर सैकड़ों छात्र छात्राएं मौजूद थे।
मुझे अलीगढ़ आने से रोका गया, धमकाया: डॉ. कफील
। एएमयू के छात्रों को समर्थन देने पहुंचे डाक्टर कफील ने कहा कि उन्हें यहां नहीं आने के लिए अलीगढ़ के पुलिस प्रशासन और एएमयू प्रशासन ने धमकी भरे अंदाज में चेतावनी दी। लेकिन उन्होंने इसे नकार दिया। डॉ. कफील ने कहा कि जब मैं जेल में था तो यहां एएमयू में भी मेरी गिरफ्तारी का विरोध हुआ था। मुझे न्याय दिलाने के लिए यहां पर भी आंदोलन हुआ। इसके बाद मैंने इरादा कर लिया था कि मैं एएमयू जरूर जाऊंगा जरूर चाहे योगी जी कितना भी रोकें।
उन्होंने कहा कि मुझे दो महीने पहले क्लीन चिट मिल गई थी। योगी जी को लगा कि अब कैसे फंसाया जाए। अब कह रहे हैं कि मैं सरकार के खिलाफ बोलता हूं। इस जुल्म के दौर में बोलेेगा कौन? मैं भी चुप रहा तो कौन बोलेगा? डॉ. कफील पर गोरखपुर के एक हास्पिटल में बच्चों की मौत के बाद आरोप लगे थे। बाद में वह निर्दोष साबित हुए। वह अभी निलंबित चल रहे हैं।