अध्यक्ष पद पर बिहार के तीन छात्र आमने-सामने
एएमयू छात्रसंघ चुनाव में इस बार अध्यक्ष पद के लिए बिहार के तीन छात्रों की दावेदारी चर्चा में है। यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार अध्यक्ष पद के लिए बिहार से तीन छात्र चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें भूगर्भ विज्ञान विभाग के शोधार्थी शरजील इकबाल, नोमान अशरफ और असमर फरीदी शामिल हैं। अध्यक्ष पद के लिए एक ही राज्य से तीन छात्रों की दावेदारी ने इस बार के चुनावी मुकाबले को खास बनाने के साथ बिहार के छात्रों के लिए चुनौती भी बन गई है। किस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे यह सोचकर छात्र असमंजस में हैं। वहीं, यूपी से अब्दुल वहीद ने छात्रसंघ अध्यक्ष पद के प्रत्याशी के रूप में दावेदारी ठोकी है।
जीशान जिंदाबाद... चतुर रामलिंगम वाले अंदाज में फिर छाए नाइजीरियाई छात्र अयूबा
बॉलीवुड फिल्म थ्री इडियट्स के किरदार चतुर रामलिंगम के अंदाज में हिंदी में मजेदार भाषण देकर सुर्खियों में आए नाइजीरिया के छात्र अयूबा एक बार फिर चर्चा में हैं। एएमयू के छात्रसंघ चुनाव में उनकी दिलचस्पी बढ़ गई है। प्रत्याशी उनसे समर्थन मांग रहे हैं। इसी बीच अयूबा ने अपने खास अंदाज में एएमयू कोर्ट मेंबर के प्रत्याशी जीशान भार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया। उनका जीशान जिंदाबाद कहने का अंदाज भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है।
बाइक रैलियों से ताकत दिखा रहे प्रत्याशी
प्रत्याशी प्रचार-प्रसार के लिए बाइक रैलियां निकालकर अपनी ताकत दिखा रहे हैं। हॉस्टल, हॉल और विभागों में विद्यार्थियों से संपर्क कर समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो गई है। चुनावी माहौल के बीच अब विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दे भी प्रचार के केंद्र में रहेंगे। अध्यक्ष पद के प्रत्याशी शरजील इकबाल ने बताया कि छात्रहित में कार्य करेंगे और छात्रों से जुड़े मुद्दे न सिर्फ उठाएंगे, बल्कि यूनिवर्सिटी प्रशासन से मनवाएंगे। उन्होंने कहा कि हॉस्टल की समस्याएं, शैक्षणिक सुविधाएं, फीस, कैंपस की व्यवस्था और विद्यार्थियों की अन्य मांगें हैं।
पूर्व छात्र अहमद ने चुनाव की तारीख पर उठाए सवाल
चुनाव की तारीख दिवाली के आसपास रखे जाने पर पूर्व छात्र नेता डॉ. कुंवर मोहम्मद अहमद ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव में हिंदू छात्र भी भागीदार हैं। ऐसे में चुनावी कार्यक्रम तय करते समय उनकी धार्मिक और पारिवारिक भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए था। छात्रसंघ चुनाव सभी विद्यार्थियों का लोकतांत्रिक मंच है, इसलिए चुनाव की तारीखें तय करते समय किसी भी वर्ग के विद्यार्थियों की सुविधा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इस संबंध में मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. जावेद तालिब का पक्ष जानने के लिए उन्हें कई बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया।