अंग्रेजी भाषा में ‘दियर इज स्टोरी बिहाइंड इवरी स्टोरी (हर कहानी के पीछे की कहानी है)’ किताब लिखकर एएमयू छात्रा तस्नीम कौसर इन दिनों चर्चा में हैं। माता-पिता का साया सिर से उठने के बावजूद तस्नीम कौसर ने विपरीत परिस्थितियों से लड़कर यह मुकाम हासिल किया है। अपराजिता बनीं तस्नीम कई किताबों पर काम कर रही हैं, जो जल्द प्रकाशित होंगी। उनका कहना है कि वह उत्कृष्ट लेखक बनना चाहती हैं।
छपरा (बिहार) निवासिनी तस्नीम ने बताया कि जब वह दो साल की थीं, तब उनकी मां का निधन हो गया था। कुछ साल बाद उनके सिर से पिता का भी साया उठ गया था। इसके बाद रिश्तेदारों की मदद से छपरा में हाईस्कूल तक पढ़ाई की। फिर एएमयू के स्कूल में 11वीं में दाखिला लिया। अब एएमयू से बीए कर रही हैं। तस्नीम ने बताया कि पिता ने ही उनमें लेखन का जुनून पैदा किया था। पिता बचपन से ही उनको पत्रिकाओं में लिखने के लिए प्रेरित किया करते थे। कई वर्षों की मेहनत के बाद उनकी पहली किताब ‘हर कहानी के पीछे की कहानी है’ छपकर आ गई है। किताब अंग्रेजी भाषा में है। इस किताब के बारे में उन्होंने बताया कि हर इंसान की एक अपनी कहानी होती है, उस कहानी को जानना चाहिए। इसके बाद उसके बारे में सोचना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति गलत बयान देता है या कुछ गलत करता है तो उसके पीछे कोई न कोई कारण जरूर रहा होगा। तस्नीम ने कहा कि किताब लिखने का विचार उन्हें तब आया, जब वह ट्रेन में यात्रा कर रही थीं। उन्होंने कहा कि वह सफल लेखक बनना चाहती हैं ताकि उनके लिखे शब्दों से लोग प्रभावित हों। यह सफलता का पहला कदम है। वह कुछ और किताबों पर काम कर रही हैं, जो जल्द प्रकाशित होंगी।