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एएमयू: सात महीने में पांच ने लिखकर कहा...खुदकुशी के आ रहे ख्याल, 20 हॉल में एक भी प्रोवोस्ट ने नहीं मांगी मदद

Sun, 30 Aug 2026 03:14 PM IST
Chaman Kumar Sharma इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

एएमयू में 21 फरवरी 2025 को मुमताज हॉस्टल के एक छात्र की मौत हुई थी। इसके बाद 25 अक्तूबर को वीमेंस कॉलेज हॉस्टल में एक छात्रा की मौत हुई। 12 जनवरी 2026 को एसएन हॉस्टल में छात्रा की मौत हुई। 12 अगस्त को इंदिरा गांधी हॉल में छात्रा की मौत हुई और 28 अगस्त को निजी हॉस्टल में एक छात्र की मौत हुई।
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मृतक एएमयू छात्र कृष्णा, उनके दुखी पिता विक्रांत शर्मा - फोटो : फाइल फोटो व संवाद
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विस्तार
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एएमयू में पिछले दो साल में पांच विद्यार्थियों की आत्महत्या के बाद मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विश्वविद्यालय के 20 हॉल में से किसी भी प्रोवोस्ट ने अब तक विद्यार्थियों की काउंसिलिंग के लिए मनोविज्ञान विभाग से मदद नहीं मांगी है। 117 विभागों में भी महज चार-पांच विभागों ने काउंसिलिंग के लिए मनोविज्ञान विभाग से संपर्क किया है। यानी विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेषज्ञ व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद उसका इस्तेमाल हॉस्टल स्तर पर कितना हो रहा है, यह सवाल अब सामने है।

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पांच मौतें, काउंसिलिंग व्यवस्था का इस्तेमाल कितना हुआ?
एएमयू में 21 फरवरी 2025 को मुमताज हॉस्टल के एक छात्र की मौत हुई थी। इसके बाद 25 अक्तूबर 2025 को वीमेंस कॉलेज हॉस्टल में एक छात्रा की मौत हुई। 12 जनवरी 2026 को एसएन हॉस्टल में छात्रा की मौत हुई। 12 अगस्त 2026 को इंदिरा गांधी हॉल में छात्रा की मौत हुई और 28 अगस्त 2026 को निजी हॉस्टल में एक छात्र की मौत हुई। इन घटनाओं के बीच विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर काउंसिलिंग की जरूरत लगातार सामने आती रही है। इसके बावजूद मनोविज्ञान विभाग के अनुसार अभी तक केवल चार-पांच विभागों ने ही विद्यार्थियों की काउंसिलिंग के लिए मदद मांगी है।

प्रोवोस्ट और वार्डन की भूमिका पर सवाल
हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की रोजमर्रा की समस्याओं और उनके व्यवहार में आने वाले बदलाव को सबसे पहले समझने की जिम्मेदारी प्रोवोस्ट और वार्डन की होती है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या हॉस्टल की व्यवस्था में विद्यार्थियों से नियमित संवाद को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है?

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आत्महत्या के पीछे बताए जा रहे कारण
एएमयू के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. शाह आलम ने कहा कि विद्यार्थियों में सामाजिक संवाद कम होना भी चिंता का विषय है। वरिष्ठ और जूनियर विद्यार्थियों के बीच संवाद का अभाव, कमरे में साथी से बातचीत के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहना, कोरोना काल के बाद नए विद्यार्थियों के बीच परिचय और संवाद की कमी, खेल के मैदान से दूरी, माता-पिता की निगरानी का अभाव और वार्डन का विद्यार्थियों के साथ पर्याप्त संवाद न होना जैसे कारणों पर ध्यान देने की जरूरत है। गुमसुम रहने वाले विद्यार्थी के व्यवहार में बदलाव को साथी विद्यार्थियों द्वारा नजरअंदाज करना भी जोखिम बढ़ा सकता है।

गर्ल्स हॉस्टल में अब शोधार्थी रखेंगे नजर
मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाह आलम ने बताया कि गर्ल्स हॉस्टल में वॉलंटियर्स बनाए जाएंगे। एक शोधार्थी को पांच-पांच कमरों की जिम्मेदारी दी जाएगी। वह छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनेंगी। गंभीर समस्या सामने आने पर वार्डन और प्रोवोस्ट को इसकी जानकारी दी जाएगी। अगले चरण में बॉयज हॉस्टल में भी छात्रों की काउंसिलिंग की जाएगी।
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सात महीने में पांच ने लिखकर कहा...खुदकुशी के आ रहे ख्याल
बीते सात महीने में पांच विद्यार्थियों ने प्रॉक्टर कार्यालय को पत्र भेजकर अपने मन में खुदकुशी के विचार आने की बात कही है। विद्यार्थियों के ये पत्र मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित विद्यार्थियों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें विश्वविद्यालय बुलाया। अभिभावकों की मौजूदगी में काउंसिलिंग हुई। साथ ही एसएसपी को पत्र भेजकर जानकारी दी गई।

हाजिरी अधूरी, छात्र ने काउंसलिंग के लिए भेजा पत्र
विधि विभाग के तीन छात्रों ने प्रॉक्टर कार्यालय पत्र भेजकर कहा है कि वे अवसाद में हैं और उन्हें काउंसलिंग के लिए मदद चाहिए। शनिवार दोपहर पत्र पढ़ते समय प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद पहले मुस्कराए, लेकिन फिर उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल अभिभावकों को बुलाने के निर्देश दिए।इस बीच प्रॉक्टर ने बताया कि विधि विभाग के 23 छात्रों की हाजिरी अधूरी है जिनमें ये तीन भी शामिल हैं। फिर भी उनके पत्र को गंभीरता से लिया जाएगा।
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