आत्महत्या के पीछे बताए जा रहे कारण
एएमयू के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. शाह आलम ने कहा कि विद्यार्थियों में सामाजिक संवाद कम होना भी चिंता का विषय है। वरिष्ठ और जूनियर विद्यार्थियों के बीच संवाद का अभाव, कमरे में साथी से बातचीत के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहना, कोरोना काल के बाद नए विद्यार्थियों के बीच परिचय और संवाद की कमी, खेल के मैदान से दूरी, माता-पिता की निगरानी का अभाव और वार्डन का विद्यार्थियों के साथ पर्याप्त संवाद न होना जैसे कारणों पर ध्यान देने की जरूरत है। गुमसुम रहने वाले विद्यार्थी के व्यवहार में बदलाव को साथी विद्यार्थियों द्वारा नजरअंदाज करना भी जोखिम बढ़ा सकता है।
गर्ल्स हॉस्टल में अब शोधार्थी रखेंगे नजर
मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाह आलम ने बताया कि गर्ल्स हॉस्टल में वॉलंटियर्स बनाए जाएंगे। एक शोधार्थी को पांच-पांच कमरों की जिम्मेदारी दी जाएगी। वह छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनेंगी। गंभीर समस्या सामने आने पर वार्डन और प्रोवोस्ट को इसकी जानकारी दी जाएगी। अगले चरण में बॉयज हॉस्टल में भी छात्रों की काउंसिलिंग की जाएगी।
सात महीने में पांच ने लिखकर कहा...खुदकुशी के आ रहे ख्याल
बीते सात महीने में पांच विद्यार्थियों ने प्रॉक्टर कार्यालय को पत्र भेजकर अपने मन में खुदकुशी के विचार आने की बात कही है। विद्यार्थियों के ये पत्र मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित विद्यार्थियों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें विश्वविद्यालय बुलाया। अभिभावकों की मौजूदगी में काउंसिलिंग हुई। साथ ही एसएसपी को पत्र भेजकर जानकारी दी गई।
हाजिरी अधूरी, छात्र ने काउंसलिंग के लिए भेजा पत्र
विधि विभाग के तीन छात्रों ने प्रॉक्टर कार्यालय पत्र भेजकर कहा है कि वे अवसाद में हैं और उन्हें काउंसलिंग के लिए मदद चाहिए। शनिवार दोपहर पत्र पढ़ते समय प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद पहले मुस्कराए, लेकिन फिर उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल अभिभावकों को बुलाने के निर्देश दिए।इस बीच प्रॉक्टर ने बताया कि विधि विभाग के 23 छात्रों की हाजिरी अधूरी है जिनमें ये तीन भी शामिल हैं। फिर भी उनके पत्र को गंभीरता से लिया जाएगा।