गजाला अहमद, कैबिनेट सदस्य, एएमयू छात्र संघ
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) छात्रसंघ के नेताओं को आशंका है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज का मामला गरमाने के बाद जेएनयू के गायब छात्र नजीब का मुद्दा दब जाएगा। कुछ छात्र नेता डीयू के मौजूदा प्रकरण को सरकार की चाल के रूप में भी देख रहे हैं।
विख्यात इतिहासकार इरफान हबीब द्वारा कन्हैया, शहला राशिद और उमर खालिद को युवाओं का रोल मॉडल बताने पर भी छात्रसंघ के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। जबकि यूनिवर्सिटी की महिला छात्र नेताओं ने गुरमेहर कौर का खुलकर समर्थन किया।
गत दिनों एएमयू के शिक्षक एवं छात्रों द्वारा रामजस कॉलेज प्रकरण को लेकर एबीवीपी के विरोध में मार्च निकाला गया था। इसमें प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने छात्रों एवं शिक्षकों को संबोधित करते हुए जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया, उमर और शहला राशिद को युवाओं का रोल मॉडल बताया था। इसको लेकर भीतर ही भीतर एएमयू में भी तीव्र प्रतिक्रिया है।
जेएनयू छात्र संघ की पूर्व उपाध्यक्ष शहला राशिद के खिलाफ तो एएमयू छात्र संघ की कैबिनेट सदस्य गजाला अहमद ने चंद दिनों पहले थाना सिविल लाइन में तहरीर भी दी थी। एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष फैजुल हसन ने कहा कि कुछ दिन पहले उमर ने फेसबुक पर एएमयू छात्रों की तुलना एबीवीपी कार्यकर्ताओं से की थी।
अध्यक्ष का कहना है कि गत दिनों कैंपस में निकाले गए मार्च से एएमयू छात्र संघ का कोई संबंध नहीं है और न ही संघ के पदाधिकारी इसमें शामिल हुए। अध्यक्ष को आशंका है कि रामजस कॉलेज का मौजूदा प्रकरण नजीब के मुद्दे को दबाने का षड्यंत्र है। इस मुद्दे के उछलने के बाद नजीब का मामला दब गया है।
उपाध्यक्ष नदीम अंसारी का भी यही कहना है कि एएमयू छात्र संघ एबीवीपी के खिलाफ है, लेकिन कम्युनिस्टों के साथ नहीं है। एएमयू की राजनीति में सक्रिय कई नेता कन्हैया, शहला राशिद एवं उमर को युवाओं का रोल मॉडल मानने से भी इंकार करते हैं। यह भी ध्यान देने की बात है कि रामजस कॉलेज प्रकरण को लेकर एएमयू में सक्रिय एसआईओ एवं एसएआईआई भी चुप है।