उत्तर प्रदेश में 1998-99 से 2021-22 तक राज्य और इसके विभिन्न क्षेत्रों में वन क्षेत्र अपेक्षाकृत स्थिर रहा है। राज्य स्तर पर वन क्षेत्र में मामूली वृद्धि दर्ज की गई, जो 7.1 फीसदी से बढ़कर 7.5 फीसदी हो गया। पश्चिमी क्षेत्र में 4.6 फीसदी से 5.1 फीसदी तक की वृद्धि हुई, जबकि पूर्वी क्षेत्र में स्थिर रहा। बुंदेलखंड का वन क्षेत्र 7.8 फीसदी से बढ़कर 9.6 फीसदी हो गया।
कई जिलों में सड़कें तो बेहतर हो गई हैं, लेकिन बाजार और कर्ज की सुविधाएं अब भी कमजोर हैं। इससे किसानों को उनकी फसल का सही दाम और समय पर आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में सुधार जरूर दिखा है, लेकिन बुंदेलखंड अभी भी पीछे है। बुंदेलखंड में पानी बचाने और सूखा सहने वाली तकनीकों पर ध्यान दिया जाए, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में बेहतर सिंचाई और किसानों को नई तकनीक सिखाने की जरूरत है।-प्रो. अब्दुस सलाम, अर्थशास्त्र विभाग, एएमयू
सिंचाई के तरीकों में बदलाव, भूजल स्तर गिरना चिंताजनक
पहले किसान नहरों पर ज्यादा निर्भर थे, लेकिन अब ट्यूबवेल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में यह बदलाव ज्यादा देखने को मिला है। इससे भूजल स्तर गिरने की चिंता भी बढ़ गई है। बुंदेलखंड क्षेत्र अब भी किसान तालाब और अन्य सतही जल स्रोतों पर निर्भर है।
पश्चिमी क्षेत्र
सहारनपुर, मुज़फ्फरनगर, शामली, बिजनौर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, अमरोहा, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, एटा, कासगंज, मैनपुरी, बदायूं, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा, औरैया है।
मध्य क्षेत्र
खीरी, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, लखनऊ, रायबरेली, कानपुर देहात, कानपुर, फतेहपुर, बाराबंकी, बुंदेलखंड, जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट।
पूर्वी क्षेत्र
प्रतापगढ़, कौशांबी, इलाहाबाद,फैजाबाद, अंबेडकर नगर, सुल्तानपुर, अमेठी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, सिद्धार्थ नगर, बस्ती, संत कबीर नगर, महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर,देवरिया,आजमगढ़,मऊ,बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली,वाराणसी, संत रविदास नगर, मिर्जापुर, सोनभद्र हैं।