एएमयू की आरक्षण पॉलिसी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देने और केस जीतने वाले मथुरा के डॉ. नरेश अग्रवाल को एएमयू में दाखिला नहीं मिला था। यह खुलासा स्वयं डॉ. नरेश अग्रवाल ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में किया है।
फोन पर बताया कि उन्होंने झांसी से एमबीबीएस की थी। एएमयू में पीजी कोर्स में एडमिशन के लिए आवेदन किया था। प्रवेश परीक्षा अच्छी गई थी जिससे एडमिशन मिलने की पूरी उम्मीद थी। लेकिन 50 प्रतिशत आरक्षण एवं अन्य पॅालिसी के कारण बाहर से आए छात्रों को एडमिशन नहीं मिला।
इसके विरुद्ध वह अन्य अभ्यर्थियों के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट चले गए और एएमयू की एडमिशन पॉलिसी को चुनौती दी। जिसमें उन्हें जीत मिली। हाईकोर्ट ने एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान मानने से भी इंकार कर दिया था। डॉ. नरेश ने कहा कि बात करीब दस साल पुरानी है। इसलिए अभी सारी बातें ठीक से याद नहीं हैं।
उन्होंने बताया कि केस जीतने के बाद उन्हें फेल घोषित कर दिया गया था। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार से पत्राचार के बाद 2005 में एएमयू इंतजामिया ने सबसे पहले जेएन मेडिकल कॉलेज के पीजी कोर्स में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया था। इसके कारण एक्सटर्नल अभ्यर्थी पीजी कोर्स में दाखिले से वंचित कर दिए गए थे। इसके विरुद्ध डॉ. नरेश अग्रवाल समेत कई अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।