अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में महिलाओं से भेदभाव संबंधी प्रख्यात इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब के बयान के मुददे पर कुछ महिला शिक्षकाें ने विविके डीएसडब्लू प्रोफेसर अनीस इस्माईल को आड़े हाथ लिया है।
उन्हाेंने डीएसडब्लू के एएमयू में शिक्षिओं एवं छात्राआें से भेदभाव नहीं होने वाले बयान का खंडन करते हुए उनकी कई समस्याएं गिनाई हैं। शिक्षिकाओं का दावा है कि इन समस्याओं को बारबार उठाने के बावजूद अब तक समाधान नहीं निकला है। प्रो. इरफान हबीब के बयान के बाद से पूरे विश्वविद्यालय में लिंगभेद पर जबरदस्त बहस छिड़ गई है।
डीएसडब्लू साहब को प्रो. इरफान हबीब के बयान पर सोच समझ कर बयान देना चाहिए। प्रो. इरफान के बयान तथ्यों के आधार पर सही हैं। एएमयू में अंडर ग्रेजुएट रेगूलर कोर्सेज में लड़कों की तुलना में लड़कियों के लिए सीट कम है।
यूजी गर्ल्स की पढ़ाई की व्यवस्था (कुछ कोेेेर्सेज को छोड़कर) वीमेंस कॉलेज में है। सीमित संसाधनों की वजह से यहां सीटें कम हैं। इस वजह से यहां एडमिशन के लिए कट ऑफ हाई होता है। लड़कियों को वीमेंस कॉलेज के अलावा यूनिवर्सिटी के यूजी कोर्स में दाखिले का विकल्प होना चाहिए। यह लिंग भेदभाव से जुड़ा मसला है।
- डॉ. शादाब बानो, शिक्षिका एएमयू
किशनगंज सेंटर पर लड़कियों को तालिबानी रूल में रखा जाता है। मुस्लिम परिवार की लड़कियों को उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए बहुत स्ट्रगल करना पड़ता है। एएमयू प्रशासन लड़की या महिलाओं की शिकायत को गंभीरता से नहीं लेता। उन्हें आवाज उठाने से रोका जाता है। इसकी वजह से उत्पीड़न करने वालों को शह मिलती है। किशनगंज से एक लड़की मिलने पहुंची तो उससे अधिकारी नहीं मिले। - डॉ. रिजवान, किशनगंज सेंटर से बर्खास्त शिक्षिका
मुझे नहीं लगता कि एएमयू में लड़कियों से भेदभाव होता है। यहां अवसर बहुत हैं। लड़कियों को उसे हासिल करने आना चाहिए। अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना चाहिए। अक्सर देखा गया है कि एएमयू में लड़कियां खुद अपने अधिकार के लिए आगे नहीं आतीं। ऐसे में प्रशासन क्या कर सकता है। एक तरफा प्रशासन पर आरोप लगाना उचित नहीं है।
-गुलफिजा खान, पूर्व अध्यक्ष वीमेंस कॉलेज स्टूडेंट यूनियन