अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में पांच साल में विदेशी छात्रों की संख्या में कमी आई है। हर साल विद्यार्थियों की तादाद घट रही है। हालांकि, दो साल में देश तो बढ़े, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या कम रही। इसकी वजह पुणे, दिल्ली की अपेक्षा एएमयू में महंगी फीस और आवागन की सुचारु व्यवस्था नहीं होना माना जा रहा है।
वर्ष 2023-24 में 19 देशों के 178 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था। इनमें 76 छात्राएं थीं। स्नातक में 52, परास्नातक में 35, 91 शोधार्थी थे। वर्ष 2024-25 में 26 देशों के 170 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है। इनमें 49 छात्राएं हैं। स्नातक में 57, परास्नातक में 44, शोधार्थी 69 हैं। वर्ष 2021-22 में 253 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था। इनमें 84 छात्राएं थीं। 146 शोधार्थी थे। पिछले पांच साल में न्यूजीलैंड, जर्मनी, लीबिया, कजाकिस्तान, सऊदी अरब के विद्यार्थियों ने एएमयू से दूरी बना ली है।
पांच फीसदी सीटों पर आरक्षण
एएमयू में पांच फीसदी सीटों पर विदेशी विद्यार्थियों के लिए प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में आरक्षण है। हालांकि, सामान्य डिग्री, डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए अलग-अलग सीटें आरक्षित हैं। एएमयू के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के सलाहकार प्रो. सैयद अली नवाज जैदी ने बताया कि विदेशी विद्यार्थियों को उनके देश से छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है। इसलिए यहां विद्यार्थियों की संख्या में थोड़ी-बहुत कमी आई है। पुणे, दिल्ली को विदेशी विद्यार्थी मुफीद मान रहे हैं, क्योंकि उनके देश से यहां आना-जाना आसान है। कई निजी विश्वविद्यालयों में बहुत कम फीस है।