नगर निगम का दावा है कि विवादित भूमि पर मौके पर कोई निर्माण नहीं है। जमीन बिल्कुल खाली पड़ी है इसलिए एएमयू की ओर से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा-38(2) के तहत खतौनी में संशोधन का वाद निरस्त किए जाने योग्य है।
नगर निगम ने अभिलेखों के मजबूत साक्ष्य और राजस्व दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष एसडीएम कोल न्यायालय में रखा है। न्यायालय से अनुरोध किया है कि एएमयू की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र को खारिज किया जाए। पूर्व में पारित स्थगन आदेश को समाप्त किया जाए और नगर निगम के पक्ष को स्वीकार किया जाए। -प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त, नगर निगम
हम अभी दस्तावेजों का अध्ययन कर रहे हैं। नगर निगम की ओर से जो प्रतिवेदन और साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं उनके लिए हम अपनी ओर से अपने दस्तावेज देख रहे हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी। उसमें एएमयू की ओर से भी अपना प्रतिवेदन रखा जाएगा। - प्रो. मोहम्मद नवेद, प्रॉक्टर, एएमयू
एएमयू ने बताया है खुद को असली मालिक
दूसरी ओर, एएमयू प्रशासन ने रजिस्ट्रार के माध्यम से पूर्व में प्रार्थना पत्र देकर दावा किया था कि यह भूमि 1940-1941 में गवर्नर की ओर से पंजीकृत दस्तावेजों के जरिये अर्जित की गई थी। एएमयू का तर्क था कि इस पर जमींदारी विनाश अधिनियम लागू नहीं होता और वे इस भूमि के असली मालिक हैं।