एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में एम्स की तरह एडवांस कार्डियक सेंटर बनेगा। इसके लिए जमीन मांगी गई है। यहां कार्डियक सेंटर में एक ही इमारत में चार-पांच मंजिलों में कई तरह की बीमारियों के इलाज की सारी सुविधाएं होंगी। ईसीजी से लेकर एंजियोप्लास्टी तक की सुविधा दी जाएंगी।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की तर्ज पर एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में एडवांस कार्डियक सेंटर बनेगा। इसके लिए एएमयू इंतजामिया से अनुरोध किया गया है।
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हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. आसिफ हसन ने बताया कि एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में एडवांस कार्डियक सेंटर बनने की योजना है। मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी सेंटर के पास जमीन देने के लिए इंतजामिया को प्रस्ताव भेजा है। पीजीआई और एम्स जैसे संस्थान में एडवांस कार्डियक सेंटर है। कार्डियक सेंटर में एक ही इमारत में चार-पांच मंजिलों में कई तरह की बीमारियों के इलाज की सारी सुविधाएं होती हैं। अगर यहां भी ऐसी इमारत बन जाती है, तो मरीजों, तीमारदारों के साथ डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को इलाज करने में काफी सहूलियतें मिलेंगी, क्योंकि उन्हें सात-आठ जगह ईसीजी से लेकर एंजियोप्लास्टी तक के लिए चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
प्रो. आसिफ हसन ने कहा कि अलीगढ़ और आसपास जिलों से दिल्ली बहुत दूर है और वहां का इलाज भी महंगा है। दिल्ली के मुकाबले अलीगढ़ में बहुत कम पैसे में इलाज हो जाता है। कार्डियक सेंटर बनने से मरीजों को काफी सुविधाएं मिलेंगी। एएमयू प्रशासन का पूरा प्रयास है कि मरीजों को सस्ता, बेहतर और आधुनिक इलाज मिल सके। उम्मीद है कि जल्द ही इसका प्रस्ताव मंजूर होगा और जमीन मिलने के साथ इस सेंटर की स्थापना होगी।
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वर्ष 1980 में बना था हृदय रोग विभाग
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में वर्ष 1980 में हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. मोहम्मद अहमद ने हृदय रोग विभाग की स्थापना की थी। कैथ लैब की स्थापना हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. आसिफ हसन ने की थी। उन्होंने 2016 में पहली एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की, जब पीएमएसएसवाई योजना के तहत कैथ लैब की स्थापना की गई थी। डॉ. आसिफ हसन 2016 से 2019 तक वह सेंटर ऑफ कार्डियोलॉजी के निदेशक थे। 1986 में कार्डियोलॉजी और कार्डियोवास्कुलर रिसर्च सेंटर की स्थापना प्रो. एमयू रब्बानी ने की थी।