अलीगढ़। जम्मू-कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों के बहाने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय इंतजामिया को घेरने की तैयारी चल रही है। अमुटा नेताओं ने इसका खाका तैयार कर लिया है। अमुटा की आम सभा में पारित प्रस्ताव की अनदेखी कर शिक्षकों द्वारा बाढ़ पीड़ितों के लिए दी गई सहायता राशि को मनमर्जी से खर्च करने का आरोप इंतजामिया पर लग रहा है।
3 नवंबर को एएमयू अधिकारियों द्वारा जारी आफिस मेमो के बाद बाढ़ पीड़ितों का मामला एक बार फिर गरमाता नजर आ रहा है। इसमें बताया गया है कि बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए एएमयू में 1.16 करोड़ जमा हुए थे। इसमें शिक्षकों के अतिरिक्त अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्रों के सर सैयद डीनर के भी पैसे शामिल है।
166 शिक्षकों के आग्रह पर करीब 7.4 लाख रुपये वापस कर दिए गए। उसके बाद शेष बचे 1.9 करोड़ रुपये से जम्मू-कश्मीर में बाढ़ से तबाह हुए सौ लोगों का आशियाना बनवाने का दावा किया जा रहा है। प्रत्येक लाभार्थी को करीब 1.9 लाख रुपये मिले। राशि लाभार्थी के खाते में सीधे आरटीजीएस के माध्यम से दो बार (पहली किश्त 25 जून 15 एवं दूसरा किश्त 13 अक्टूबर 2015) में ऑन लाइन भेजा गया। इसका विवरण 7 नवंबर को एएमयू ईसी में भी पेश किया जाएगा।
यह मेमो सार्वजनिक होने के बाद शिक्षक नेताओं की भौंहें तन गई है। उनका कहना है कि वर्ष 2013 में बाढ़ से जम्मू-कश्मीर में भारी तबाही हुई थी। एएमयू शिक्षकों ने बाढ़ पीड़ितों की त्वरित सहायता के लिए अपने एक दिन का वेतन दिया था। लेकिन इंतजामिया सहायता राशि दबा कर बैठ गई।
दो साल तक पीड़ितों को मदद नहीं दी गई तो मई और जून 2015 में अमुटा की आमसभा में पैसे वापस लेने एवं उसे अपने तरीके से बाढ़ पीड़ितों पर खर्च करने का प्रस्ताव पारित किया गया। लेकिन इंतजामिया ने अमुटा के प्रस्ताव की अनदेखी कर आनन-फानन में पैसे खर्च कर दिए। शिक्षक नेता लाभार्थी के चयन से लेकर पैसे दिए जाने तक पर सवाल उठा रहे है। आने वाले समय में यह मामला तूल पकड़ सकता है।