भारत सरकार एवं एएमयू एक्ट का उल्लंघन कर एक प्राइवेट ट्रस्ट को 51.78 लाख रुपये का भुगतान एएमयू द्वारा किया गया है। वह भी उस परिस्थिति में जबकि उस ट्रस्ट का सचिव व्यक्तिगत तौर पर एकाउंट आपरेट करने को अधिकृत हैं। इसका खुलासा भारतीय लेखा तथा लेखा परीक्षा विभाग ने वर्ष 2014-15 की रिपोर्ट में किया है। मीडिया के पास आडिट रिपोर्ट पहुंचने के बाद एएमयू इंतजामिया में खलबली मच गई है।
केनरा बैंक एएमयू ब्रांच से आईसीआईसी बैंक न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी ब्रांच, न्यू दिल्ली के एकाउंट नंबर (004605012668) में 51,78,634.00 रुपये आरटीजीएस के माध्यम से यूनिवर्सिटी द्वारा ट्रांसफर किए गए है। यह एकाउंट एक प्राइवेट ट्रस्ट सर सैयद एजूकेशनल फाउंडेशन के नाम है और इसके संचालन के लिए इसके सचिव सलमान जाफरी को अधिकृत किया गया है। एएमयू के वर्तमान कुलपति इस ट्रस्ट के लाइफ टाइम ट्रस्टी व्यक्तिगत रूप में हैं। आडिट रिपोर्ट में साफ-साफ कहा गया है कि प्राइवेट एकाउंट में 51.78 लाख का ट्रांसफर एएमयू एक्ट, एकाउंट कोड एवं भारत सरकार के फाइनेंस रूल्स का उल्लंघन कर किया गया है। एएमयू प्रशासन ने राशि का ट्रांसफर मुजफ्फरनगर में स्कूल खोलने के नाम पर किया है। लेकिन इस संबंध में यूनिवर्सिटी यह जानकारी नहीं दे रही है कि यह ट्रांसफर किस रूल के अंतर्गत किया गया है।
आडिट रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि जनवरी 4, जनवरी 16 एवं 29 जनवरी 2016 को रिमाइंडर दिए जाने के बावजूद यूनिवर्सिटी की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई। नियमों को ताक पर रखकर प्राइवेट ट्रस्ट को ट्रांसफर की गई राशि की रिकवरी एवं इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश यूजीसी एवं केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से की गई है। इस संबंध में एएमयू के अधिकारी कुछ साफ-साफ कुछ बोलने को तैयार नहीं है। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि जिस राशि पर आडिट ने आपत्ति दर्ज की है, वह छात्रों की डिनर की राशि है, जो उन्होंने स्वेच्छा से दी थी। उनका यह भी कहना है कि हो सकता है आडिट टीम को उस समय जवाब नहीं दिया गया हो, भविष्य में स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।