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Aligarh News: तीखे विरोध के बीच दुकानें सील कर नगर पालिका ने लीं कब्जे में

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लंबे समय से विवादों में घिरीं नगर पालिका परिषद कार्यालय के नीचे बनीं 33 विवादित दुकानों को नगर पालिका ने मजिस्ट्रेट और फोर्स की मौजूदगी में अपने कब्जे में ले ली हैं। कई दुकानों से सामान बाहर निकालकर उनको सील कर पालिका ने अपने कब्जे में ले ली हैं।
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कुछ दुकानदारों को कहना था कि उनकी दुकान से भारी सामान नहीं निकल सका है उसे ज्यों की त्यों सील कर दिया गया। उक्त दुकानदारों को समय दिया गया है कि वह जब भी अपना प्रार्थना पत्र दें उनका सामान सील खोलकर बाहर निकलवा दिया जाएगा।

आरटीआई कार्यकर्ता अंशुल भारद्वाज ने दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया को गलत बताते हुए शिकायत शासन में की थी। विजीलेंस आदि टीमों ने इसकी जांच की तो शिकायत सही पाई गई। इस मामले में दो पूर्व चेयरपर्सन, दो ईओ व निर्माण लिपिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी और आवंटन निरस्त कर दिया गया था। दुकानदार हाईकोर्ट गए, लेकिन कोई राहत नहीं मिली और उनकी याचिकाएं खारिज कर दी गईं। दस साल तक चली लंबी लड़ाई के बाद एसडीएम सुमित सिंह ने सख्त रुख अपनाया और दुकानें खाली कराने को तहसीलदार राजेश वर्मा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की। बुधवार को तहसीलदार, ईओ अमिता वरुण पालिका कर्मियों के साथ अतरौली, पालीमुकीमपुर, हरदुआगंज, गोधा थानों की फोर्स लेकर मौके पर पहुंचे तो दुकानदारों से दुकानें खाली कराईं। कुछ दुकानदारों ने स्वत: ही सामान बाहर निकाल लिया। कुछ महिलाओं को आगे किया लेकिन उनकी एक नहीं चली।
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पुलिस बल के आते ही तनाव की स्थिति बनी

पुलिस फोर्स के आने के बाद दुकानदार चिल्लाकर विरोध करने लगे। मगर भारी संख्या में फोर्स मौजूद होने के कारण हालात तनाव पूर्ण बने। तहसीलदार राजेश वर्मा व ईओ ने दुकानदारों से वार्ता की। अंत में दुकानदारों के पास सरकारी आदेश का पालन करने में प्रशासन का सहयोग करने के अलावा कोई चारा नहीं था।



- शासन के आदेश पर दुकानों को सील कर पालिका के कब्जे में दे दिया है। पालिका अब नए सिरे से दुकानों का आवंटन कराएगी। दुकानें पुन: लेने के लिए दुकानदार नीलामी प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। - राजेश वर्मा, तहसीलदार।

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- दुकानदारों ने दुकानें खाली करने में सहयोग किया है। नीलामी प्रक्रिया में अगर पुराने दुकानदार भाग लेते हैं तो उनके प्रीमियम राशि को समायोजित किया जाएगा, उनसे किश्तों में धनराशि जमा करने में राहत दी जा सकती है। - अमिता वरुण, ईओ।



- 10 साल लंबी लड़ाई के बाद दुकानों को खाली हो सकी हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। नई आवंटन प्रक्रिया में यदि नगर पालिका सरकारी नियमों की अनदेखी करेगी तो लड़ाई फिर से शुरू होगी। - अंशुल भारद्वाज, शिकायतकर्ता
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