कोविड डेडीकेटेड एल टू श्रेणी के पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय में कोरोना संक्रमित या संदिग्ध मरीजों की तादाद सर्वाधिक है। इसलिए यहां होने वाली मौतों की संख्या भी बहुत ज्यादा है। इस बीच स्पष्ट जिम्मेदारी और रिकार्ड नहीं बनने के कारण कई शवों के बारे में आधिकारिक और पुष्ट जानकारी नहीं हो पा रही है।
बीते सोमवार और मंगलवार को यहां 17 लोगों की मौत हुई, जिसमें 13 लोगों के शव उनके परिजनों को सुपुर्द कर दिए गए। चार शवों को कोविड डेडीकेटेड श्मशान गृह मुक्तिधाम नुमाइश मैदान भेजना बताया गया। जानकारी करने पर पता चला कि वहां केवल दो शव ही पहुंचे, दो नहीं। अमर उजाला ने 20 मई बृहस्पतिवार के अंक में इस संबंध में खबर प्रकाशित की, जिस पर मंडलायुक्त गौरव दयाल ने एसडीएम कोल रंजीत सिंह से जांच कराई।
एसडीएम कोल एवं कोविड डेडीकेटेड दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय के प्रभारी अधिकारी रंजीत सिंह की जांच में बीते 17 मई सोमवार- 18 मई मंगलवार को चार कोरोना संक्रमित शव अंतिम संस्कार के लिए नुमाइश मैदान स्थित कोविड डेडीकेटेड मुक्तिधाम श्मशान गृह भेजना बताया गया है।
वहीं मुक्तिधाम प्रबंधन अभी तक अपनी बात पर कायम है, मानव उपकार संस्था के अध्यक्ष विष्णु कुमार बंटी ने कहा है कि 17 और 18 मई को केवल दो शव ही उनके पास पहुंचे, जिनका अंतिम संस्कार हुआ। बाकी के दो शव कहां गए, इसके बारे में सुपुर्दगी लेने वाले परिजन ही बता सकते हैं। मंडलायुक्त गौरव दयाल के निर्देश पर एसडीएम कोल की जांच के बाद भी मामला सुलझा नहीं।
हां, इस खबर का एक असर जरूर सामने आया। अब दीनदयाल अस्पताल से मुक्तिधाम शव ले जाने वाले एंबुलेंस चालक श्मशान गृह से एक पर्ची लेकर आएंगे। जिसमें शव से संबंधित जानकारी, गाड़ी नंबर, ड्राइवर का नाम, मोबाइल नंबर और मृतक के साथ दी जाने वाली हॉस्पिटल की बॉडी डिस्चार्ज रसीद होगी।
ऐसा इसलिए किया गया ताकि हरेक शव के कोविड डेेडीकेटेड श्मशान गृह तक पहुंचने की पूरी जानकारी रिकार्ड में भी लाई जाए। वहीं बड़ा सवाल ये भी है कि कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने के लिए तमाम व्यवस्थाएं की जा रही हैं, तो फिर संक्रमित या संदिग्ध संक्रमित मृतकों के अंतिम संस्कार में ऐसी लापरवाही क्यों की जा रही है।
17 और 18 मई को अगर 17 लोगों का निधन हुआ तो उन सभी का अंतिम संस्कार कोरोना के प्रोटोकाल के तहत ही कराया जाना चाहिए था, लेकिन हो ये रहा है कि 17 में केवल 2 को संस्कार कोविड डेडीकेटेड श्मशान गृह में हुआ, बाकी 15 को अलग अलग स्थानों पर जलाया गया।
यह भेजे गए थे कोरोना संक्रमित मृतकों के शव
सोमवार और मंगलवार को दीनदयाल अस्पताल से चार कोरोना संक्रमित शव भेजे गए थे। जिनमें से दो शवों का ही अंतिम संस्कार हुआ। क्वार्सी क्षेत्र के संगम बिहार कॉलोनी निवासी कृष्णा देवी और सासनीगेट के आरकेपुरम फेस-2 निवासी जगमोहन लाल गुप्ता के शवों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार नुमाइश श्मशान स्थल पर हुआ। जबकि सासनीगेट के साकेत बिहार कॉलोनी निवासी राजवती और कासगंज के दुर्गा कॉलोनी निवासी मुन्नी देवी का अंतिम संस्कार डेडिकेटिड श्मशान स्थल पर नहीं हुआ है।
अस्पताल प्रबंधन ने यह तो कह दिया कि चार शवों का अंतिम संस्कार नुमाइश श्मशान स्थल पर हुआ है, जबकि हकीकत यह है कि वहां दो शव पहुंचे ही नहीं हैं। कोरोना संक्रमित दो शव कहां गए, कहां उनका दाह संस्कार हुआ। प्रोटोकॉल का पालन हुआ कि नहीं, इस सवाल पर अस्पताल प्रबंधन टालमटोल कर रहा है।