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क्वार्सी चौराहे पर अतिक्रमण से जाम, ऑटो - ई रिक्शा वालों की मनमानी

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किशनपुर तिराहा पर लगा जाम। - फोटो : CITY OFFICE
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यातायात अव्यवस्थाओं से जूझते चौराहों की पड़ताल के क्रम में मंगलवार को अमर उजाला की टीम शहर के मुख्य क्वार्सी चौराहे पर पहुंची। मंडल मुख्यालय और सौ शैय्या युक्त दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के पास का यह चौराहा दिन भर जाम से जूझता रहता है। डिवाइडर, ट्रैफिक लाइट और चार-चार ट्रैफिक कर्मी भी इस जाम को नहीं संभाल पाते। हालात ये हैं कि चौराहा कहने को तो बहुत चौड़ा है। मगर, अतिक्रमण ने सभी संसाधनों पर पानी फेर दिया है। ऑटो, ई-रिक्शा वाले भी मनमानी करते हैं। चौराहे के चारों मार्गों पर दिन भर रहने वाले अस्थायी अतिक्रमण को हटाने के अफसरानों की ओर खूब प्रयास हुए। मगर, अतिक्रमणकारी सिस्टम को ठेंगा दिखाते रहते हैं।
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रामघाट रोड पर दीनदयाल अस्पताल के सामने से लेकर चौराहे तक दोनों ओर जबरदस्त अतिक्रमण देखने को मिला। हालात ये थे कि सड़क किनारे तो खानपान के ठेले लगाने वालों ने अतिक्रमण कर रखा था। उनके सामने ही ऑटो और ई रिक्शा वाले उल्टे-सीधे खड़े थे। वाहनों के लिए दोनों लेन पर बमुश्किल 5-7 फीट ही जगह निकलने के लिए थी। इसके बाद चौराहे से अनुपशहर रोड पर मंडलायुक्त कार्यालय की ओर नजारा देखें तो वहां भी पैठ मैदान के सामने तक अस्थायी अतिक्रमण था। ऐसे ही क्वार्सी चौराहा से तालानगरी की ओर जाने वाली सड़क पर चलें तो यहां हाल और बुरा था। इस रोड पर तो ठेलों, ई-रिक्शा, ऑटो के साथ ही अतरौली की ओर जाने वाली प्राइवेट बसें आधे से ज्यादा मार्ग को घेरे रहती हैं। आलम यह है कि वाहन सवारों को तो छोड़े दें, पैदल जाने वालों के लिए भी रास्ता नहीं मिलता। क्वार्सी चौराहा से 500 मीटर तक यही हाल दिखा। इधर, एटा बाईपास पर सपा कार्यालय के सामने तक अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर रखा है। यहां कई खोखे बिल्कुल सड़क से सटे हुए रखे हैं।
ट्रैफिक लाइटें बेअसर, अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार कौन
अतिक्रमण के चलते इस चौराहे पर पल भर में जाम लग जाता है, जिस ओर ट्रैफिक बत्ती लाल हो जाती है, उसी ओर 500 से 800 मीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। जब बत्ती हरी होती है तो वाहन चालक यहां से निकलने के लिए जूझते नजर आते हैं। इसके बाद भी 20 सेकंड में पूरी तरह से कतार में लगे वाहन निकल नहीं पाते हैं। इसके लिए जिम्मेदार अतिक्रमण है। यहां महीने, दो महीने में एक बार अभियान जरूर चलाया जाता है। मगर, सुबह अभियान चलाकर सरकारी तंत्र चौराहे से अतिक्रमण हटवाता है तो शाम को वह फिर से आ जमता है। अधिकारी अभियान चलाने का दावा करके वाहवाही लूटते हैं और चले जाते हैं। मगर, जनता जाम से जूझती रहती है।
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एंबुलेंस का सायरन भी नहीं खोल पा रहा जिम्मेदारों के कान
क्वार्सी चौराहा से मात्र 100 मीटर की दूरी पर दीनदयाल अस्पताल है। जिलेभर के मरीजों का यहां आना-जाना लगा रहता है। बगल में ही एक निजी ट्रामा सेंटर है। अगर, कहीं कोई हादसा होता है तो घायलों को सबसे पहले उपचार के लिए यहीं लाया जाता है। वर्तमान में यह दीनदयाल अस्पताल कोविड एल-2 के तौर पर भी संचालित है। अस्पताल आने वाली एंबुलेंस अक्सर चौराहे पर लगे जाम और अतिक्रमण से जूझती नजर आती हैं। सायरन बजता रहता है। मरीज तड़पता रहता है। इसके बाद भी जिम्मेदारों के कानों तक न तो मरीजों के तड़पने और न ही एंबुलेंसों के सायरन की आवाज पहुंच पा रही है।
नगर निगम ने कई बार अतिक्रमण अभियान चलाकर सिर्फ खानापूर्ति की है। यातायात पुलिस ने अब ट्रैफिक लाइटें भी स्थापित कर दी हैं। इसके बाद भी जनता को जाम से राहत नहीं मिल पा रही है। - रिंकू दिवाकर निवासी क्वार्सी चौराहा
चौराहे पर जाम के लिए अतिक्रमण जिम्मेदार है। ई-रिक्शा, ऑटो, ठेले व प्राइवेट बस वाले मनमानी करके जहां तहां खड़े हो जाते हैं। हर रोज यहां एंबुलेंस फंसती हैं। मंडलायुक्त तक की गाड़ी कई बार जाम में फंसी है। इसके बाद भी जाम से अधिकारी निजात नहीं दिला पा रहे हैं।
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अजय कुमार शर्मा, मिठाई विक्रेता
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