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19 वर्षों में अमर उजाला लाया 19 बदलाव: हर मुश्किल हुई आसान.. सपने किए साकार

Fri, 23 Jan 2026 01:51 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

अमर उजाला ने भी पूरे दमखम के साथ जनता से जुड़े मुद्दों, उनकी निजी समस्याओं को भी सहयोगी बनके दूर कराते हुए सपनों को साकार कराया है। अखबार की सार्थक पहल ने काम न सिर्फ आसान बनाया, बल्कि लोगों का आत्मविश्वास भी बढ़ाया।
 
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अलीगढ़ अमर उजाला कार्यालय - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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अमर उजाला अलीगढ़ ने अपने 19 वर्ष के सफर में जिले की समस्याओं और मुद्दों पर भी खूब साथ निभाया है। यूनिट स्थापना के 19 साल गुजर गए, मगर लगता है कि यह कल की ही बात है। शहरवासियों ने धूमधाम से अपने चहेते अखबार को हाथों हाथ लिया। इस रोमांचक सफर में अमर उजाला ने भी पूरे दमखम के साथ जनता से जुड़े मुद्दों, उनकी निजी समस्याओं को भी सहयोगी बनके दूर कराते हुए सपनों को साकार कराया है। अखबार की सार्थक पहल ने काम न सिर्फ आसान बनाया, बल्कि लोगों का आत्मविश्वास भी बढ़ाया।

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अमर उजाला ने इनके जीवन में लाया बदलाव
1-श्यौराज की रिहाई: 2004 में हरियाणा पुलिस द्वारा घर से गिरफ्तार कर ले जाए गए बरला के गांव दिलालपुर के बेगुनाह श्यौराज को उम्रकैद की सजा हो गई। अमर उजाला ने श्यौराज की पत्नी सुनीता और मासूम बच्चों की आवाज उठाई। बात अलीगढ़ से लखनऊ, चंडीगढ़ और दिल्ली तक पहुंची। समय जरूर लगा मगर बेगुनाह श्यौराज को बेकुसूर मानकर 2012 में रिहा किया गया। उसके माथे से अपराध का कलंक हटा। इसके लिए पूरा परिवार अमर उजाला का आभारी है।
2-कुपोषण के खिलाफ जंगल: बिजौली के गांव सिरसा की 9 वर्षीय बेटी लक्ष्मी कुपोषण का शिकार थी और उसके तालू में छेद था। वह इलाज के लिए हरियाणा के सहारे थी। 2019 में लक्ष्मी की आवाज अमर उजाला बना। विषय मुद्दा बना। लक्ष्मी को अलीगढ़ में इलाज मिला। आज वह स्वस्थ है। साथ में 100 करीब अन्य बच्चों के भी इलाज हुए। लक्ष्मी का परिवार आज भी अमर उजाला का आभारी है।
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3-अमित की किडनी बदली: 2013-14 में भारतीय सेना में चयनित टप्पल के गढ़ी सूरजमल के अमित की किडनी खराब हो गई। किडनी बदलने के लिए और उपचार के लिए आर्थिक सहायता कराने में अमर उजाला ने अमित के परिवार की मदद की। इस सहयोग के सहारे उसकी दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में इलाज चला और किडनी बदली गई। इस प्रयास से अमित का परिवार अमर उजाला का आभारी है।
4-बबलू के दिल का इलाज: इगलास की मास्टर कालोनी के बबलू को दिल की बीमारी थी। उसकी इस बीमारी में इलाज के लिए अमर उजाला ने परिवार की मदद की। समाज के लोगों को जगाकर बच्चे के इलाज में सहयोग कराया। आज यह परिवार भी अमर उजाला का आभारी है।
5-गुलशाना को दिलाई छांव: चंडौस के रामपुर शाहपुर की गुलशाना पर पारिवारिक रंजिश में 2018 में तेजाब से हमला हुआ। इस हमले में उसके आंखों में परेशानी आई। अमर उजाला ने उसकी आवाज को मुद्दा बनाया। उसे छांव संगठन तक पहुंचाया। उसे मुआवजा मिला व बाद में छांव के सहयोग से उसकी आंख का ऑपरेशन कराया गया।

6-मुआवजे की जंग ने बदला कानून: यमुना एक्सप्रेस वे के लिए भूमि अधिग्रहण शुरू हुआ। 2010 में किसानों ने मुआवजे को मुद्दा बनाया। अमर उजाला ने किसानों का साथ दिया। किसान आंदोलन में तीन किसान शहीद हुए। देश दुनिया में आवाज बुलंद हुई। तत्कालीन सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून को बदला।
7-कानपुर शताब्दी का ठहराव: दिल्ली कानपुर शताब्दी शुरू की गई। मगर इसका अलीगढ़ में ठहराव नहीं दिया गया। इसे अमर उजाला ने मुद्दा बनाया। अलीगढ़ की जरूरत पर ध्यान आकर्षित कराया। नतीजा हुआ कि 2017 में इस ट्रेन का अलीगढ़ में ठहराव शुरू हुआ।
8-जेल रोड, क्वार्सी-एटा चुंगी ओवरब्रिज: शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार की जरूरत के मद्देनजर अमर उजाला ने शहर के जेल रोड, क्वार्सी व एटा चुंगी पर ओवरब्रिज की आवाज को मुद्दा बनाया। इसकी का परिणाम रहा कि 2017 में जेल रोड पर ओवरब्रिज बनकर शुरू हो गया। क्वार्सी व एटा चुंगी पर निर्माण जारी है।
9-तेहरान में फंसे नौ युवकों की रिहाई हुई: रोजगार की तलाश में अलीगढ़ के गोंडा के युवक सहित देश के 9 युवक तेहरान पहुंच गए। वहां वे तस्करों के चंगुल में फंस गए। अमर उजाला ने प्रकरण मुद्दा बनाकर उठाया। केंद्र सरकार तक विषय पहुंचा। बाद में सभी 9 युवकों की रिहाई हुई।
10-सिल्ट सफाई में आया बड़ा बदलाव: किसी जमाने में शहर में सिल्ट सफाई के बाद खुले में छोड़ दी जाती थी। अमर उजाला ने इस विषय को मुद्दा बनाकर उठाया। मामले में व्यापार मंडल के सहयोग से आवाज बुलंद की। तब जाकर नगर निगम ने इस व्यवस्था में बदलाव किया।

11-27 साल बाद खुला डीएस कॉलेज ऑडिटोरियम: वर्ष 2015 में अमर उजाला ने कई साल से बंद डीएस कॉलेज के ऑडिटोरियम का मुद्दा प्रकाशित किया। इसी का नतीजा रहा कि अमर उजाला की मुहिम के चलते इसे 2016 में शुरू किया गया। आज शहर का प्रमुख आयोजन स्थल है।
12-कमिश्ररी मुख्यालय स्थापना उठी : 2008 में कमिश्ररी का दर्जा पाने वाले अलीगढ़ का यह मुद्दा सबसे पहले अमर उजाला ने ही उठाया। पहली बार खबर प्रकाशित होने पर तत्कालीन सियासी दिग्गजों ने इस मुद्दे पर शासन में पहल की। इसकी का नतीजा रहा कि अलीगढ़ को कमिश्ररी का दर्जा मिला।
13-खिलाड़ियों के सपनों में भरी उड़ान: बात एथलीट कल्पना की हो या क्रिकेटर रिंकू की। अमर उजाला ने इन सभी के सपनों के को पंख लगाने में सहयोग किया। आर्थिक तंगी से जूझ रही एथलीट कल्पना की मदद अमर उजाला के सहयोग से हुई। आज वह एनआईएस कोच हैं। इसी तरह रिंकू के प्रदर्शन में भी अमर उजाला का सहयोग रहा।
14-जिन्ना की तस्वीर बनी मुद्दा: एएमयू के यूनियन हॉल में लगी जिन्ना की तस्वीर 2017 में अमर उजाला के अंक में सबसे पहली बार प्रकाशित हुई। बाद में वह ऐसा सियासी मुद्दा बनी कि देश की संसद तक में गूंजा। आज भी उस पर समय-समय पर बहस जारी है।
15-एलमपुर सरकारी आवासों से अवैध कब्जे हटे : अमर उजाला ने 2019 में एलमपुर के सरकारी आवासों पर अवैध कब्जे को मुद्दा बनाया। सरकारी योजना के हाल को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस मामले में एक जेई के निलंबन के बाद अवैध कब्जे हटवाए गए।
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16-मेडिकल कॉलेज को एंबुलेंस माफिया के चंगुल से मुक्त कराया: तीन वर्ष पहले अमर उजाला ने मेडिकल कॉलेज में एंबुलेंस माफिया का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इस मामले में कार्रवाई करते हुए एएमयू इंतजामिया ने वहां एंबुलेंस का पंजीकरण शुरू कराकर नियमानुसार एंबुलेंस संचालन शुरू कराया।
17-अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति से कई के सपनों को पंख लगाया: एएमयू सिटी हाईस्कूल के छात्र आजमगढ़ के मो.सलीम सहित कई छात्र ऐसे रहे, जिन्हें अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति ने मदद दी। बाद में उनके जीवन की राह बदली।
18-अलीगढ़ को ट्रांसपोर्ट नगर की राह दिखाई: उद्योग नगरी के रूप में ख्यातिप्राप्त इस शहर में अपना ट्रांसपोर्ट नगर नहीं था। जिसे अमर उजाला ने मुद्दा बनाया। लगातार इस पर आंदोलन हुए। बाद में एडीए द्वारा अलीगढ़-पलवल हाईवे पर ट्रांसपोर्ट नगर विकसित किया गया।
19-रिंग रोड को पूरा करने पर सर्वे शुरू : अलीगढ़ के रिंग रोड को अमर उजाला ने मुद्दा बनाया। जिस पर अब सर्वे शुरू हुआ है। राज्य सरकार ने प्रस्ताव एनएचएआई को भेजा है। सर्वे पूरा होते ही रिंग रोड बनने के संकेत हैं।
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