अतरौली नगर पालिका परिषद ने वर्ष 2006-07 के तहत कार्यालय के नीचे कुल 39 दुकानें बनायी थीं। जिसमें वर्ष 2011, 2012, 2014 व 2015 में अलग-अलग दुकानों का आवंटन नगर पालिका की ओर से किया गया। इस आवंटन को लेकर स्थानीय आरटीआई कार्यकर्ता अंशुल भारद्वाज ने सूचना का अधिकार नियम के तहत जानकारी ली। उन्होंने गलत तरीके से आवंटन होने की शिकायत की।
अतरौली नगर पालिका परिषद अतरौली में बनी 39 सरकारी दुकानों के आवंटन में हुए घोटाले के प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुकानदारों की याचिका को खारिज करते हुए दुकानों का आवंटन निरस्त कर दिया है। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने आवंटन घोटाले के आरोपी तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी की अग्रिम जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा एवं जयंत बनर्जी की अदालत ने नगर पालिका से सेवानिवृत अधिशाषी अधिकारी चंद्रिका प्रसाद मिश्रा की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर दिया है।
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अतरौली नगर पालिका परिषद ने वर्ष 2006-07 के तहत कार्यालय के नीचे कुल 39 दुकानें बनायी थीं। जिसमें वर्ष 2011, 2012, 2014 व 2015 में अलग-अलग दुकानों का आवंटन नगर पालिका की ओर से किया गया। इस आवंटन को लेकर स्थानीय आरटीआई कार्यकर्ता अंशुल भारद्वाज ने सूचना का अधिकार नियम के तहत जानकारी ली। उन्होंने गलत तरीके से आवंटन होने की शिकायत की।
आरोप था कि 39 दुकानों को बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए अथवा खुली बोली का पालन किए बिना ही आवेदन के आधार पर 31 दुकानों का आवंटन अपने चहेतों को दिया गया। तत्कालीन एसडीएम ललित कुमार की आख्या पर डीएम हृषिकेश भास्कर यशोद ने आवंटन को अवैध मानते हुए विजीलेंस जांच की संस्तुति की। आगरा की विजीलेंस टीम ने जांच की। तत्कालीन लिपिक नानक चंद, नगर पालिका अध्यक्ष रेखा शर्मा, साजिदा बेगम, अधिशाषी अधिकारी चंद्रिका प्रसाद मिश्रा एवं गुलशन कुमार सूरी समेत पांच के खिलाफ आगरा विजीलेंस थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई।
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कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल हुआ। इस पर अधिशाषी अधिकारी चंद्रिका प्रसाद मिश्रा ने कोर्ट में याचिका दायर कर दी। शासन ने आवंटित दुकानों को खाली कराने के निर्देश दिए। इस पर डीएम ने एसडीएम व सीओ अतरौली के नेतृत्व में टीम बना दी। इस बीच संबंधित दुकानदार इस आदेश के खिलाफ कोर्ट चले गए। हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद रिट याचिका को खारिज कर दिया गया। नगर पालिका परिषद के अफसरों का कहना था कि इन दुकानों को आवंटित करने के लिए निविदाएं आमंत्रित करने के लिए कई विज्ञापन जारी किए गए, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसलिए दुकानों का आवंटन किया गया।