अलीगढ़। श्री गंगा अवतरण दिवस बृहस्पतिवार को है। जिसे गंगा सप्तमी भी कहा जाता है। इस बार पूजा पाठ, गंगा में डुबकी लगाकर स्नान करने, भंडारे जैसे कार्यक्रम रद्द हैं। ऐसे में गंगा स्नान तो दूर की बात है, उनके दर्शन करना ही दुर्लभ होगा। सिर्फ पांच लोग गंगा मां की आरती करेंगे और वापस आ जाएंगे। गंगा अवतरण दिवस के अवसर पर गंगा को स्वच्छ बनाने की मुहिम चलाने वाले तथा गंगा भक्तों ने कहा कि वर्षों बाद गंगा मां अपने स्वरूप में आई हैं। अब लॉकडाउन के बाद घर से बाहर निकले तो स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना है। जिससे हमारा जीवन भी सुरक्षित रहे।
कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम रद्द चल रहे हैं। इसी तरह 30 अप्रैल को गंगा जन्मोत्सव के अवसर पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले सामूहिक कन्या विवाहोत्सव, भंडारा, शर्बत वितरण, दान पुण्य और गंगा स्नान पर प्रतिबंध है। ऐसे में श्रद्धालु अपने घर में रहकर ही पूजा पाठ कर सकते हैं। शहर से पांच गंगा भक्त राजघाट पर गंगा की आरती करके वापस आएंगे। इसके अलावा कोई भी कार्यक्रम नहीं होगा। हां, राजघाट क्षेत्र के जरूरतमंद परिवारों में गंगा भक्त राहत सामग्री व भोजन प्रसादी बंटवाने की व्यवस्था कर रहे हैं। जबकि अधिकांश श्रद्धालु गंगा अवतरण दिवस पर घर के पूजा स्थल मे रखे गंगाजल को पानी में मिलाकर स्नान करेंगे। इसके बाद घरों में पूजा पाठ का दौर चलेगा।
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कई जगह से रिपोर्ट आई हैं कि गंगा का पानी 100 प्रतिशत शुद्ध हो गया है। मछलियां घाटों पर तैरती हुई दिखाई दे रही हैं। अब लोगों से अपील है कि लॉकडाउन खुलने के बाद गंदगी, कूड़ा, कचरा गंगा में न डालें। क्योंकि लॉकडाउन की वजह से पर्यटन ठप पड़ा हुआ है। लोग गंगा के पास नहीं पहुंचे तो गंगा ने अपना स्वरूप निर्मल बना लिया है। इसका मतलब कहीं न कहीं हम जिम्मेदार थे कि गंगा निर्मल नहीं थी। फैक्ट्रिया, ड्रेनेज आदि बंद होने से गंगा की निर्मलता के साथ पर्यावरण भी शुद्ध हुआ है। आशा करते हैं कि देश का प्रत्येक नागरिक लॉकडाउन के बाद स्वच्छता मिशन की भावना को बरकरार रखेंगे। पर्यावरण व जीवनदायिनी जैसी पवित्र नदियों का संरक्षण कर ही हम मानव जीवन का संरक्षण कर पाएंगे।
-श्यौराज सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गंगा सेवा समिति।
राजघाट पर बड़ा कार्यक्रम होना था। पांच कन्याओं की शादी के साथ भंडारा, भजन संध्या जैसे कई आयोजन रद्द कर दिये हैं। अब सिर्फ शहर से पांच लोग उचित दूरी बनाते हुए गंगा आरती करेंगे। वहीं प्रसादी की व्यवस्था राजघाट के प्रधान को सौंपी जा रही है। वह अपने स्तर से प्रसादी बनवाकर लोगों के घरों में भिजवा देंगे। जनता से अपील है कि लॉकडाउन ने प्रदूषण को काफी कम किया है। हवा साफ है, वातावरण शुद्ध है, गंगा का पानी 100 प्रतिशत शुद्ध है। ऐसे में इनके संरक्षण के लिए हम सभी के अंदर भावना रहनी चाहिए। हम कहीं भी गंदगी नहीं करेंगे तो स्वतः ही प्रकृति हमारे अनुकूल रहेगी। इसलिए सभी प्रण ले कि प्रकृति व मां गंगा को साफ रखने के लिए प्रयासरत रहेंगे। मानव जीवन के लिए प्रकृति का संरक्षण भी जरूरी है.
-कालीचरण वार्ष्णेय, पन्नालाल वार्ष्णेय चैरिटेबिल ट्रस्ट।
-ठा. श्यौराज सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गंगा सेवा समिति।
- फोटो : AMAR UJALA
-ठा. श्यौराज सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गंगा सेवा समिति।
-कालीचरण वार्ष्णेय, पन्नालाल वार्ष्णेय चैरिटेबिल ट्रस्ट।
- फोटो : AMAR UJALA
-कालीचरण वार्ष्णेय, पन्नालाल वार्ष्णेय चैरिटेबिल ट्रस्ट।