न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
बन्नादेवी क्षेत्र के बरौला इलाके में सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी दंपती हत्याकांड में मंगलवार को दोषी छोटे भाई को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह फैसला जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने सुनाया है। आठ वर्ष पूर्व इस घटना में छोटी बहू के चरित्र पर संदेह को लेकर बड़े भाई ने छोटे भाई को समझाया था। इसी बात पर घर में विवाद हुआ था और गुस्से में आए छोटे भाई ने बड़े भाई व भाभी की हत्या कर दी। दंपती के घर में सोते समय ईंटों से कुचलकर मौत के घाट उतारा गया था।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता डीजीसी फौजदारी धीरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार, घटना 20 जून 2014 की रात की है। सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी बनवारी लाल शर्मा व उनकी पत्नी श्याम लता अपने बरौला स्थित आरा मशीन के सामने वाले मकान में सोए हुए थे। रात में उनकी किसी ने हत्या कर दी और महिला के पहने हुए जेवरात लूट लिए। घटना में अगले दिन छोटे बेटे कुलदीप गौड़ निवासी प्रतिभा कॉलोनी ने अज्ञात में मुकदमा दर्ज कराया था। कई दिन तक चली जांच पड़ताल के बाद पुलिस व परिवार के शक की सुई बनवारी लाल के सगे छोटे भाई भुकरावली निवासी नरेंद्र गौड़ पर घूमी। कुलदीप ने 16 अगस्त को अपने उत्तराखंड निवासी डॉक्टर भाई संदीप की सहमति से अपने चाचा नरेंद्र गौड़ के खिलाफ तहरीर दी।
इस तहरीर पर नरेंद्र की गिरफ्तारी हुई और पूछताछ के बाद उसकी निशानदेही पर श्याम लता के जेवर बरामद किए गए। पुलिस ने खुलासा किया कि नरेंद्र की पत्नी के चरित्र पर संदेह व उसकी गलत हरकतों को लेकर अक्सर बनवारी लाल टोकाटाकी करते थे। कई बार उसे डांटा डपटा भी था। घटना से एक सप्ताह पहले भी घर बुलाकर डांटा था। इसी बात से गुस्से में आकर और भाई-भाभी पर समाज में पत्नी की बदनामी का आरोप लगाकर नरेंद्र ने इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने मामले में दंपती की हत्या व जेवरात लूट की धाराओं में तहरीर दी।
न्यायालय में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर आरोपी को हत्या का दोषी करार दिया गया। लूट के मामले में तय पाया गया कि उसने आवेशवश मृत महिला के शरीर से जेवरात उतारे थे। इस आधार पर हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद व 25 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। संवाद
ये नौ गवाह किए गए पेश
डीजीसी के अनुसार, इस घटना में कुल 9 गवाह व 10 वें आरोपी के बयान दर्ज किए गए, जिनमें बड़ा बेटा संदीप, छोटा कुलदीप, बेटी हेमलता, घटना का खुलासा करने वाले तत्कालीन एसओ व रवि त्यागी, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर अनिल, एक अन्य भूपेंद्र, एसओ श्याम सिंह यादव, बनवारी लाल, ललित गौड़ शामिल हैं।
गुस्से के साक्ष्य : मौके पर मिले थे खून से सने 13 पत्थर
डीजीसी के अनुसार, अदालत में यह साक्ष्य पुलिस विवेचक की ओर से फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पेश किए गए, जिसमें बताया कि मौके पर खून से सने 13 पत्थर मिले थे। इससे साबित होता है कि हत्या को वहीं पड़े ईंट पत्थरों से दोनों के सिर कुचलकर व शरीर के अन्य हिस्सों पर प्रहार कर अंजाम दिया गया।
चोटों ने पेश किए दरिंदगी के साक्ष्य
डीजीसी के अनुसार, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की रिपोर्ट व डॉक्टर की मौखिक गवाही में दरिंदगी के साक्ष्य पेश किए गए। दोनों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया कि मौत पोस्टमार्टम से करीब आधा दिन पहले सिरों में चोट व अत्यधिक रक्तस्राव से हुई है। पुरुष के शरीर में सिर पर, कान के पास, कोहनी में, सिर के अंदर गंभीर चोटें थीं, जबकि महिला के शरीर पर दोनों कान के पास, आंख पर, सिर पर, छाती पर चोट व फेंफड़े सूजे हुए थे।
- यह हत्याकांड बेहद नृशंसतापूर्वक अंजाम दिया गया था। हमने मजबूत पैरवी की और अदालत से कठोरतम दंड का अनुरोध किया। न्यायालय ने साक्ष्यों व गवाही के आधार पर न्याय की मंशा की पूर्ति करते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।-धीरेंद्र सिंह तोमर, डीजीसी फौजदारी
-हम चार भाई-बहन हैं। माता-पिता की हत्या के बाद से परिवार अधूरा हो गया था। हम पर समाज व परिवार की तरहर से तरह-तरह के दबाव थे कि जो हुआ अब बात खत्म करो। मगर हमने न्यायालय पर भरोसा रखा। आज हमें संतुष्टि हुई है। हमारे माता-पिता तो वापस नहीं आ सकते। मगर न्याय से संतुष्ट हैं। - डॉ.संदीप, मृत दंपती के हल्द्वानी निवासी बेटा