न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जलाली (अलीगढ़)
दिसंबर की सर्द हवाओं में ठंड के बावजूद शेखाझील पर मेहमान परिंदे गायब हैं। जबकि इन दिनों विदेशी पक्षियों की झील पर भरमार रहती है तथा कुछ पक्षी प्रजनन भी करते हैं, लेकिन झील में पानी के न होने से पक्षी अब आगे की ओर निकल गए हैं।
अक्तूबर माह के अंतिम सप्ताह में सर्दियों की गुलाबी शुरुआत के साथ ही शेखाझील पर विदेशी परिदों की आमद और चहचहाहट से झील का वातावरण सुरमयी हो जाता था, लेकिन इस बार अपर गंग नहर के रुक जाने तथा बारिश कम होने के कारण झील में महज दस फीसदी ही पानी शेष रहा गया है।
बीस दिनों से चल रही पानी की कमी के चलते यहां आए मेहमान परिंदों में से केवल दो फीसदी परिंदे ही झील पर दिखाई दे रहे हैं। वहीं पर्यावरणविद् झील की दुर्दशा के लिए शासन, प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। आरोप है कि पक्षी विहार घोषित होने के बाद झील पर तीन करोड़ चार लाख की लागत से प्रशासनिक भवन, शौचालय तथा बाउंड्रीवॉल निर्माण के साथ दो नलकूप लगवाया जाना शामिल था। जिसमें प्रशासनिक भवन तो बन गए, जबकि झील के लिए जरूरी नलकूप का अभी काम अभी भी शुरू नहीं हो सका। यदि नलकूप की व्यवस्था की गई होती तो शायद झील में पानी की कमी नहीं होती तथा पक्षी भी ठहरते।
17 साल बाद दिसंबर में सूखी झील..
नेचर गाइड मोहम्मद ईशाक ने बताया कि 17 साल पहले वर्ष 2003 में दिसंबर माह में झील सूखी थी। तक तत्कालीन डीएफओ अनुपम गुप्ता ने झील के किनारों पर पैदल पथ तैयार कराऐ थे। जिसके चलते झील में पानी कम हो गया था, लेकिन इस बार नहर में पानी न आने तथा बारिश कम होने के कारण झील का पानी दिन व दिन कम हो रहा है।
एक पखवाड़ा पहले मौजूद थे ये मेहमान परिंदे...
ग्रेलक गूज (राजहंस), बार हेडेड गूज, ब्रह्मणी सैल डक (चकवा-चकवी), मलार्ड, मलार्ड टील, कांमन टील, पेंटिल, सौबलर, रेड पोचार्ड, टफ टफ पोचार्ड, कांमन पोचार्ड (लाल सर), कांमन कूट, पेलीकन, कार्मोस्ट सैलडक, व्हाइट पेलीकन, पेंटेड स्टार्क, ब्लैक हेडेड गल, गैडबाल, स्पून बिल डक, गार्गिनी समेत 35 से अधिक प्रजातियों के हजारों पक्षी मौजूद थे।
इस समय मौजूद प्रजाति व उनकी संख्या..
सौबलर, पेंटिल, ग्रेलेग गूज, ब्राह्मणी सेल डक, लाल सिर, टफ टफ पोचर्ड, ब्लैक पीस गुडबिड प्रजाति की संख्या घटकर दो फीसदी रह गई है।
- बर्ड सेंचुरी बनने के बाद देश दुनिया के पर्यटक यहां आने को आतुर हैं, लेकिन वर्तमान सरकार, उनके जनप्रतिनिधि तथा प्रशासनिक अधिकारी शेखाझील की दुर्दशा को लेकर लापरवाह बने हुए हैं। यदि इस बार पक्षी मुंह मोड़ गए तो इस साल शून्यता अगले कई वर्षों तक असर डालेगी।
- रंजन राना, पर्यावरणविद्
- इस बार पक्षी समय पर आ गए थे तथा बीस दिन पहले तक 35 से अधिक प्रजातियों के हजारों पक्षी मौजूद थे, लेकिन नहर में पानी नहीं आने से आज केवल दो फीसदी पक्षी शेष रह गये हैं।
मोहम्मद ईशाक, नेचर गाइड शेखाझील
- शेखाझील पर कार्यदायी संस्था को बोरिंग करनी थी, लेकिन भुगतान के अभाव में बोरिंग अभी तक नहीं हो सकी है, विभागीय स्तर पर गंग नहर के अधिकारियों से बात की जा रही है जल्द ही नहर में पानी आने की उम्मीद है।
अरविंद कुमार, क्षेत्रीय वन अधिकारी अलीगढ़ रेंज