क्वार्सी थाना पुलिस ने रोजगार देने के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश करते हुए साइबर सेल की मदद से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह रैकेट नोएडा में कॉल सेंटर संचालित कर देशभर में लॉकडाउन में बेरोजगार हुए युवक-युवतियों से ठगी कर रहा था और अब तक सैकड़ों बेरोजगारों को चूना लगा चुका है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया है।
पुलिस अधीक्षक नगर अभिषेक ने शुक्रवार को पुलिस कार्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि क्वार्सी थाने में गुलजीत कौर नाम की युवती ने खुद के साथ हुई 35 हजार की ठगी का मुकदमा दर्ज कराया। इस मुकदमे व अन्य शिकायतों पर खुद एसपी सिटी अभिषेक व एसपी क्राइम डॉ.अरविंद की निगरानी में इंस्पेक्टर क्वार्सी छोटेलाल ने साइबर सेल की मदद से काम शुरू किया तो नोएडा के सेक्टर-2 में संचालित सीएस प्राइम सोल्यूशन कॉल सेंटर का नाम सामने आया। सर्विलांस डिटेल के आधार पर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। फिलहाल, तीनों को जेल भेज दिया गया है। इस सफलता पर एसएसपी ने साइबर सेल व थाना टीम टीम को 5 हजार इनाम व प्रशस्ति पत्र की घोषणा की है।
ढाई हजार से 50 हजार तक ऐंठते थे नौकरी के नाम पर
एसपी सिटी के अनुसार तीनों ने अपना कॉल सेंटर चलाना स्वीकारा और बताया कि उनकी तरह कई दोस्त भी कॉल सेंटर चलाते हैं। रोजगार से जुड़ी ऑनलाइन वेबसाइट साइन डॉट काम, मॉनस्टर इंडिया डॉट काम, नौकरी डॉट काम से बेरोजगार लोगों का डाटा चुराते हैं। फिर उन बायोडाटा पर अंकित मोबाइल नंबरों पर अपने कॉल सेंटर से फोन कराते हैं। उनके कॉल सेंटर से कॉल करने वाला बेरोजगार को जॉब देने वाली कंपनी का कंसलटेंट बताता है। उन्हें जॉब ऑफर करने के साथ-साथ ऑनलाइन इंटरव्यू, ऑफर लैटर देने जैसे लालचों में फंसाते हैं। इस दौरान जब बेरोजगार युवक उनके जाल में फंस जाता है तो उससे प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज या ज्वाइनिंग लेटर भेजने आदि के नाम पर ढाई हजार रुपये से लेकर 25 व 50 हजार रुपये तक अपने एकाउंट में डलवाए जाते हैं। जो शिकार जाल में फंसकर रुपये भेजने को तैयार हो गया, वह ठगी का शिकार हो गया। जो नहीं फंसा, उस को फोन करना बंद कर दिया जाता है।
देश के कई राज्यों के बेरोजगारों को बनाया शिकार
एसपी सिटी ने बताया कि उन्होंने या उनके स्टाफ ने जिन मोबाइल नंबरों से बात की है। वह फर्जी आईडी पर लिए गए हैं और यूनियन बैंक सहित अन्य कई बैंक शाखाओं के जिन खातों में रकम डलवाई है, वह भी फर्जी पहचान पत्र, फोटो आदि की मदद से खुलवाए गए हैं। उन नंबरों, खातों व खुद तीनों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर कुछ और लोग भी इस रैकेट का हिस्सा हैं, जिनकी जांच में टीमें लगी हैं। खुद पूछताछ में अब तक यूपी, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड, हरियाणा सहित कई राज्यों के कई सैकड़ा लोगों को ठगना और कई लाख रुपये ऐंठना स्वीकारा है। बाकी सभी बैंकों की डिटेल की जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी।
ये हुए गिरफ्तार
- रंधीर यादव पुत्र धीरेंद्र यादव रोशनगंज सिकंदराराऊ हाथरस - सरगना
- अभिषेक चौहान पुत्र योगेंद्र सिह चौहान भूतेश्वर कालोनी सिकंदराराऊ हाथरस
- तेजप्रताप सिह पुत्र गजेंद्र सिह न्यूरिया थाना बीवर जनपद हमीरपुर
ये हुआ बरामद-
-5 मोबाइल फोन मय सिम कार्ड, 8 सिम कार्ड, 6 सीपीयू, 6 डेस्कटाप, 6 एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड, 4 आधार कार्ड, 1 लैपटाप, 1 पेन कार्ड, 1 ड्राइविग लाइसेंस, 1 वोटर आईडी, 5 हैडफोन, 1 वाईफाई डौंगल, 1 राऊटर, 4 यूपीएस, 2 कापी, 1 डायरी आदि।
गिरफ्तारी करने वाली टीम : इंस्पेक्टर क्वार्सी छोटेलाल, एसएसआई चंचल सिरोही, एसआई अरविंद सिंह, साइबर सैल से सतीश चौधरी, धीरज त्यागी, मंदीर सिंह, सौरभ आदि।