नक्शे के हिसाब से बनती बिल्डिंग तो होती परेशानी
- फोटो : Rupesh
गांधी पार्क बस स्टैंड की निर्माणाधीन बिल्डिंग के पूर्व नक्शे में यात्री सुविधा का ख्याल बिलकुल भी नहीं रखा था। यदि बिल्डिंग नक्शे के हिसाब से तैयार होती तो यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता। कर्मचारियों के तर्कपूर्ण सुझाव का नतीजा है कि निर्माणाधीन बिल्डिंग में मुख्यालय ने हस्तक्षेप करते हुए यात्री सुविधाओं का ख्याल रखा और नक्शे में परिवर्तन किया।
गांधी पार्क बस अड्डे के पूर्व नक्शे के अनुसार निर्माणाधीन बिल्डिंग में पूछताछ केंद्र बिल्डिंग के बीचोंबीच था। सार्वजनिक मूत्रालय बिल्डिंग के पीछे बना था। इस संबंध में कुछ लोग तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक से मिले और विरोध करते हुए पूछताछ केंद्र को बिल्डिंग के बाहर, मूत्रालय को बिल्डिंग के दोनों साइड में बनवाने का तर्क दिया। उनका कहना था कि स्टैंड पर बस कुछ देर के लिए रुकती है। यदि मूत्रालय बिल्डिंग के पीछे होगा तो उसका प्रयोग यात्री नहीं कर सकेगा।
इसी तरह पूछताछ केंद्र बिल्डिंग के बीचोंबीच होगा तो यात्रियों का काफी परेशानी होगी। यही नहीं, पूछताछ केंद्र में सूचना देने के लिए बैठे कर्मचारी को भी पता ही नहीं चलेगा कि कौन सी बस स्टैंड से जा चुकी है और कौन सी खड़ी है। इससे वह सही जानकारी भी नहीं सकेगा। इन तर्क पूर्ण बातों से तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक आरिफ सकलेन ने स्वीकारा और परिवर्तन के निर्देश दिए। उसी का परिणाम है कि दोनों ही स्थानों में परिवर्तन हुआ है।