अपने जन्मदिन पर कार्यकर्ताओं के साथ हवन करते कल्याण सिंह
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आज से 89 साल पहले शायद ही किसी ने सोचा होगा कि अतरौली के मढ़ौली गांव का साधारण किसान परिवार में जन्मा लोधी समाज का एक बच्चा देश एवं प्रदेश की राजनीति के शिखर पर पहुंचेगा। शिक्षक के रूप में जीवन की शुरूआत करने वाला वह युवक राजनीति का मास्टर बन गया, जिसे जमाने तक लोग याद रखेंगे।
बचपन से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ाव के कारण कल्याण सिंह में राष्ट्रवादी भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। अतरौली में एक स्कूल में मास्टर के रूप में जीवन की शुरूआत की। 35 वर्ष की उम्र में विधान विधानसभा में पहुंचने वाले कल्याण सिंह ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
उत्तर प्रदेश का दो बार मुख्यमंत्री बने। राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल बने। संगठन में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। राममंदिर आंदोलन के हीरो के रूप में लोग याद करते हैं। लोग उन्हें ‘हिंदू हृदय सम्राट’ भी कहते हैं। कल्याण सिंह के बेहद नजदीक रहे भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह हिंडोल कहते हैं कि जून 1991 में कल्याण सिंह पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
नकल अध्यादेश लाकर गुड गवर्नेंस का संदेश दिया। वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उस समय शिक्षा मंत्री थे। वह कहते हैं कि कल्याण सिंह के शासन काल को भाजपा मॉडल के रूप में पेश करती है। उनके समय में गुंडा बदमाश या तो प्रदेश छोड़ कर भाग गए थे या जेल में थे।
उनके संक्षिप्त शासन काल में विकास कार्य भी बहुत हुए थे। वह कहते थे कि गुंडा बदमाशों की पैरवी मत करना और उनसे दूर रहना। इससे मेरी और पार्टी की छवि खराब होती है। कुशल राजनीतिज्ञ और प्रशासक तथा हिंदुत्ववादी छवि के रूप में उनको लोग सदा याद रखेंगे।
अलीगढ़ में कल्याण सिंह के समय के कुछ प्रमुख कार्य
- तालानगरी औद्योगिक क्षेत्र
- पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय
- आईटीआई
- तहसील कोल
-अहिल्याबाई होल्कर स्पोर्ट्स स्टेडियम