जुलाई में मानसून भी दस्तक देने वाला है। आने वाले समय में शहर के हालात क्या होंगे? इसका अंदाजा शहर की उधड़ी पड़ी सड़कों और जगह-जगह स्मार्ट सिटी के काम के नाम पर खोदे गए गड्ढों को देखकर लगाया जा सकता है। अगर मानसून से पहले इनकी तुरपाई नहीं कराई गई तो बारिश में किसी बड़ी दुर्घटना का सामना करना पड़ सकता है।
क्योंकि शहर में होने वाले जलभराव से निपटने के लिए नगर निगम के इंतजाम नाकाफी हैं। इसकी बानगी 18 मई को हुई 45 मिनट की बारिश में देखने को मिली। रामघाट रोड पर सिपाही दंपती स्कूटी सहित नाले में जा गिरे। यह तो गनीमत रही कि दोनों चोटिल नहीं हुए, वरना बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।
पिछले वर्ष हुई मौत की घटना को भुलाया नहीं जा सकता
पिछले वर्ष महेंद्र नगर में सीवर के लिए खोदी गई सड़क में पानी भरने के कारण एक स्कूटी सवार की डूबने से मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर हंगामा हुआ, सामाजिक संगठनों का नगर निगम प्रशासन के खिलाफ आक्रोश भड़का था।
बारिश में फिलिंग या सुरक्षा इंतजाम जरूरी
आर्किटेक्ट अतहर परवेज का कहना है कि विकास और निर्माण होना अच्छी बात है। मगर उनमें हमेशा सुरक्षा के इंतजाम रखे जाते है। लेकिन यहां जो काम हो रहे हैं, उनमें इस तरह के इंतजाम नहीं हैं। कहीं गड्ढे खुले पड़े हैं तो कहीं सड़कें खुदी पड़ी हैं। कहने को कुछ जगहों पर डायवर्जन लागू हैं। मगर यहां इस तरह के चिह्न तक नहीं हैं। लोग बेरोकटोक उस दिशा में चल देते हैं। ऐसे में दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। बारिश से पहले उन गड्ढों की फिलिंग करा दी जाए, जहां लोगों की आवाजाही अधिक है। साथ में सुरक्षा इंतजाम भी किए जाएं।
नगर निगम से इन वैकल्पिक तैयारियों का है दावा
नगर निगम आयुक्त गौरांग राठी का कहना है कि शहर में बारिश के बाद 12 से 24 घंटे तक जलभराव वाले रामघाट रोड, दीवानी, गुरुद्वारा सुदामापुरी, भुजपुरा बाईपास और खैर रोड को चिन्हांकित किया गया है। इसके अलावा 12 घंटे तक जलभराव वाले गायत्री पैलेस और गूलर रोड चिह्नित किए गए हैं। बारिश के दिनों में इन सभी इलाकों में कम समय में जलनिकासी हो, इसे लेकर तैयारी की जा रही है।
इनमें से कुछ जगहों पर अतिरिक्त पंपिंग सेट लगाने की तैयारी है। रामघाट रोड का पानी एक दशक से बंद पड़ी चंदनिया पोखर में ले जाने की तैयारी है। छर्रा अड्डा पर अधिक क्षमता वाले पंपिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं। वहां आठ वर्ष से बंद पड़ा रेलवे लाइन के नीचे वाला नाला शुरू कराया जा रहा है। इसी तरह सीमा फाटक के पास रेलवे लाइन के नीचे वाला नाला शुरू करा रहे है। दीवानी के बाहर भी नाली की एक दशक पुरानी पुलिया का निर्माण कराते हुए उसे चौड़ा कराने की योजना है। जिससे कि बारिश के बाद कम समय में इन इलाकों से जल निकासी हो सके।
खुदे पड़े इलाकों में होगी बैरीकेटिंग, लगेंगे डिवाइडर
मीडिया सहायक अहसान रब का कहना है कि जिन इलाकों में निर्माण हो रहा हैं, उनमें पहले से लोगों को सूचना है। अब इन सभी जगहों पर निर्माण कार्य प्रगति पर है कि बोर्ड, बैरीकेटिंग व डिवाइडर भी लगवाए जा रहे हैं। ताकि उन इलाकों में लोगों की आवाजाही बंद रहे और बारिश के दिनों में किसी तरह की कोई दिक्कत न हो।