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अलीगढ़: भाजपा विधायक से मारपीट के मामले में निलंबित एसओ बहाल

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पिछले माह गोंडा थाने में इगलास क्षेत्र के भाजपा विधायक व तत्कालीन एसओ अनुज सैनी के बीच मारपीट मामले में निलंबित एसओ अनुज सैनी बहाल जरूर हो गए हैं। मगर उन्हें कोई क्लीनचिट नहीं मिली है। उनके खिलाफ निलंबन व आरोपों संबंधी विभागीय जांच जारी है। यह जांच एसपी सिटी स्तर से की जा रही है। यही जांच अनुज सैनी का भविष्य तय करेगी। फिलहाल अनुज सैनी को पुलिस लाइन में तैनाती दी गई।
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पिछले माह थाने में हुए इस प्रकरण के बाद शासन स्तर से अनुज सैनी को निलंबित किया गया था और एसपी देहात को यहां से स्थानांतरित कर दिया गया था। आईजी से पूरे मामले में रिपोर्ट तलब की गई थी। हालांकि, शासन स्तर से आईजी की रिपोर्ट पर अभी तक कोई एटीआर तय कर जिला पुलिस को नहीं भेजी गई है। मगर विभागीय नियमों के अनुसार अनुज सैनी को एक माह बीत जाने के बाद चार-पांच दिन पहले अनुकंपा अनुरोध के आधार पर बहाल कर दिया गया है। साथ ही उनसे पुलिस लाइन में काम किया जा रहा है।
रहा सवाल क्लीन चिट मिलने का तो उनके निलंबन और उन पर लगे आरोपों की जांच एसपी सिटी स्तर से की जा रही है। जो अभी जारी है। जांच पूरी होने पर ही क्लीनचिट मिलना तय होगा और अनुज सैनी का आगे का भविष्य तय होगा। एसपी सिटी अभिषेक के अनुसार अनुज सैनी के निलंबन मामले की जांच अभी जारी है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, वह रिपोर्ट आगे पेश की जाएगी।
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-गोंडा में निलंबित किए गए एसओ अनुज सैनी को किसी तरह की क्लीनचिट नहीं मिली है। हां, निलंबन अवधि के तीस दिन बीत जाने के बाद जांच पूरी होने तक बहाल करने का प्रवधान है, उसके तहत बहाल किया गया है। उन पर जो आरोप हैं, उनकी जांच एसपी सिटी कर रहे हैं। जांच में जो तय होगा, उसके अनुसार आगे कार्रवाई होगी। शासन से हमें सीधे कोई निर्देश नहीं मिला है।
-मुनिराज जी एसएसपी
क्या है निलंबन-बहाली नियम
पुलिस नियमावली के अनुसार अगर कोई अधिकारी/कर्मचारी किसी आरोप में निलंबित किया जाता है तो उसे निलंबन काल में आधा या उससे भी कम वेतन दिया जाता है। वहीं उस पर लगे आरोपों और निलंबन की विभागीय जांच किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा की जाती है। जांच पूरी होने से पहले भी अनुकंपा अनुरोध पर उस अधिकारी को बहाल किया जा सकता है। इस दौरान उसे मुख्य कार्यों से दूर साइड के कार्यों में रखा जाता है। फिर जांच पूरी होने पर अगर नियमानुसार अपराध छोटा है तो मिस कंडक्ट तय होती है। अपराध बड़ा है तो सेक्शन-7 के तहत बर्खास्तगी तक हो जाती है।
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